समस्तीपुर । अतिथि शिक्षकों की बहाली के बावजूद अभी भी कई महाविद्यालय ऐसे हैं जिनमें खास विषयों में शिक्षक ही नहीं है। यदि है तो महज एक। जिनके जिम्मे ही सारे नामांकित छात्रों का भविष्य है। आज हम पड़ताल कर रहे पटोरी, रोसड़ा और पूसा के महाविद्यालयों की।

अनिवार्यता के बावजूद हिदी विषय में नहीं है एक भी शिक्षक। इन महाविद्यालयों में नामांकन के लिए सभी इच्छुक रहते हैं। मगर समय के साथ तस्वीर बदल चुकी है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात छोड़िए सामान्य कक्षा संचालन भी अब इतिहास की बात हो गई है। नामांकन आज भी हो रहे हैं। इंटर से लेकर बीए तक की पढ़ाई की व्यवस्था है। बहुत बड़े कैंपस में विशाल भवन वाले इन कॉलेजों में वर्ग कक्ष की कमी नहीं है। प्रयोगशालाएं काफी समृद्ध हैं। पुस्तकालय में पुस्तकों की कमी नहीं है। मगर अब इनका उपयोग नहीं हो पाता है। इनके पीछे बस एक ही कारण है शिक्षकों की कमी। हद तो यह है कि कई विभागों में एक भी शिक्षक नहीं हैं। बावजूद इसके नामांकन होते हैं, विद्यार्थी परीक्षा भी देते हैं और पास भी करते हैं। इन सबके बीच अगर नहीं होता है तो बस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। किसी तरह काम चलाऊ पढ़ाई कर छात्र-छात्राएं पढ़ाई पूरी करते हैं। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे इन कॉलेजों में कभी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मानक रहा यह कॉलेज आज कितना बदहाल हो चुका है कि अब यहां कक्षा संचालन की बात भी नहीं होती। कैंपस में छात्र-छात्राएं सिर्फ कार्यालय संबंधी कार्यो से ही आते हैं। नामांकन के बाद परीक्षा फॉर्म भरना, प्रवेश पत्र लेना, परीक्षा के बाद अंक पत्र लेना, अगर रिजल्ट पेंडिग है तो उससे संबंधित कार्यो आदि को लेकर ही विद्यार्थी कॉलेज आते हैं। कक्षा संचालन तो जैसे शैक्षणिक गतिविधियों का हिस्सा रहा ही नहीं। आखिर हो भी कैसे। जब पढ़ाने वाले ही नहीं हैं तो कक्षा संचालन कैसे होगा।

एएनडी कॉलेज में 10 हजार छात्रों का भविष्य 12 शिक्षक के हाथों

शाहपुर पटोरी : अनुमंडल मुख्यालय में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई एएनडी कॉलेज के लगभग 10 हजार छात्र-छात्राओं पर 12 शिक्षक नियुक्त हैं। कई विभाग में वर्षों से ताले लटक रहे हैं। फिर भी अंतर स्नातक तथा स्नातक के विभिन्न विषयों में 95 फीसद से अधिक परीक्षाफल, यह एक जादू की कहानी के जैसा ही प्रतीत हो रहा है। विज्ञान विषय में सिर्फ वनस्पति तथा भौतिक विज्ञान में ही एक-एक शिक्षक हैं। आखिर विज्ञान लेकर पढ़ने वाले छात्र किस शिक्षक से पढ़ने के लिए महाविद्यालय आएंगे। अन्य विषयों का भी यही हाल है। महाविद्यालय में 50 शिक्षकों में 38 पद रिक्त हैं। ऑनर्स तक शिक्षा प्रदान करने वाली इस संस्था में शिक्षकों के अधिकांश पद रिक्त हैं। यहां सभी छात्रों के लिए हिदी विषय अनिवार्य है। आश्चर्य यह है कि कॉलेज में हिदी के एक भी शिक्षक नहीं है। जंतु विज्ञान, गणित, मनोविज्ञान, रसायन विज्ञान, राजनीति शास्त्र, इतिहास संस्कृत के भी शिक्षक नही रहने के कारण इस विषय के छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों को जरूरत के मुताबिक प्राइवेट ट्यूशन पर निर्भर रहना पड़ रहा है। दो दशक पूर्व तक कॉलेज में पर्याप्त शिक्षक थे जिससे दूसरे जिलों के भी छात्र आकर यहां शिक्षा ग्रहण करते थे। परंतु शिक्षकों के स्थानांतरण एवं सेवानिवृत्ति के कारण स्थिति बदतर होती गई। महाविद्यालय के पुस्तकालय में पर्याप्त पुस्तक भी नहीं हैं। यहां प्रयोगशाला भी नहीं खुलता।

यूआर कॉलेज रोसड़ा में आठ अतिथि व आठ नियमित शिक्षकों के भरोसे 8000 से अधिक छात्रों का भविष्य

रोसड़ा,संस: अनुमंडल मुख्यालय का अंगीभूत महाविद्यालय यूआर कॉलेज रोसड़ा मे वर्षों से वर्ग का संचालन नहीं होता है। कॉलेज में अंतर स्नातक से स्नातक तक के 8000 से अधिक छात्र-छात्रा नामांकित हैं। दो विषयों राजनीति विज्ञान एवं हिदी विषय को छोड़ अन्य विषयों के शिक्षक योगदान कर चुके हैं। हालांकि आज भी शिक्षकों का पद रिक्त है। कुल स्वीकृत 30 शिक्षकों में से नियमित 8 शिक्षक ही पदस्थापित हैं। सरकार की नई व्यवस्था के तहत 8 अतिथि शिक्षक ने अपना योगदान दिया है। बावजूद एक भी विषय में पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है।

आठ स्थायी व 10 अतिथि शिक्षकों के सहारे उमा पांडेय के 5500 छात्र

पूसा,संस : उमा पांडे महाविद्यालय। यहां न तो पढ़ने के लिए भवन है और ना ही प्रयोगशाला के लिए कमरा। यहां के 5500 छात्रों का भविष्य 8 स्थायी व 10 गेस्ट शिक्षकों के जिम्मे है। इस कॉलेज में कुल 42 स्थाई शिक्षकों के पद हैं। जिसमें मात्र 8 शिक्षक ही कार्यरत हैं। नई योजना के तहत 10 अतिथि शिक्षकों की बहाली हो पायी है। बीए एवं बीएससी में कुल 4000 छात्र यहां नामांकित हैं। भौतिकी में स्थाई 2 पद में एक कार्यरत हैं। केमिस्ट्री में 3 पद के विरुद्ध एक ही कार्यरत हैं। बॉटनी में 3 पद स्थाई हैं जो खाली पड़े हैं वहीं जंतु विज्ञान में 3 पद हैं। वह भी खाली है। गणित के 3 पद वह भी खाली। इतिहास के 4 पद में एक पद पर स्थाई शिक्षक हैं। राजनीतिक शास्त्र के 4 पद लेकिन सभी खाली। अर्थशास्त्र के दो पद में सभी खाली, समाजशास्त्र के तीन पद है जिसमें एक पद पर शिक्षक मौजूद हैं। तर्कशास्त्र के 2 पद खाली, होम साइंस दो पद पर एक खाली। हिदी के दो पद दोनों खाली। अंग्रेजी के 3 पद पर एक कार्यरत। उर्दू के दो पद दोनों खाली। मैथिली के दो पद पर एक कार्यरत हैं। वहीं मनोविज्ञान में 2 पद पर एक शिक्षक कार्यरत हैं।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस