समस्तीपुर । पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से रेलवे ने एक अहम फैसला लेते हुए स्टेशनों पर प्लास्टिक कप में चाय की बिक्री पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद से ही समस्तीपुर जंक्शन पर वेंडर कुल्हड़ों या पेपर कप में चाय बेच रहे हैं। इसी तरह सिगल यूज प्लास्टिक पर भी पूरी तरह से रोक दिख रही है। रेलवे स्टेशन पर अब पूरी तरह से बदलाव दिख रहा है। स्टेशनों और ट्रेनों की बोगियों में खाली बोतलों का कचरा न हो, इसके लिए रेलवे ने नई तरकीब निकाली है। रेलवे की इस पहल से ट्रेनों या स्टेशन परिसरों में बोतलें जहां-तहां फेंकी नजर नहीं आएंगी। रेलवे के इस कदम से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। इसकी शुरुआत समस्तीपुर रेल मंडल में हो चुकी है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत समस्तीपुर, दरभंगा, मोतिहारी एवं जयनगर स्टेशनों पर प्लास्टिक बोतल क्रशर मशीन लगाकर संचालन किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर कुल्हड़ का हो रहा उपयोग

समस्तीपुर जंक्शन पर फिलहाल कुल 11 स्टॉल संचालित हो रहे है। सभी स्टॉल पर वेंडरों द्वारा कुल्हड़ या पेपर कप का प्रयोग किया जा रहा है। इसी में रेल यात्रियों को चाय व कॉफी दी जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक प्रत्येक दिन लगभग 1400 कुल्हड़ का उपयोग हो रहा है। इसके अलावा अन्य यात्री पेपर कप में पेय पदार्थ ले रहे हैं। कुल्हड़ का उपयोग करने से वेंडरों ने इसकी कीमत में इजाफा नहीं किया है। इसके साथ सिगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं हो रहा है। बदलाव से लोगों में दिख रही खुशी

गौतम कुमार ने बताया कि रेल परिसर में सिगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पूर्णत: बंद करने का नियम बेहतर है। इससे जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण बिगड़ता पर्यावरण दुनिया के लिए समय सबसे बड़ी चिता है। ऐसे में प्लास्टिक से पैदा होने वाले प्रदूषण को रोकना और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। रजनीश कुमार ने कहा कि प्लास्टिक मिट्टी ही नहीं, पानी में भी समाप्त नहीं होता है। यह मानव शरीर ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी बहुत नुकसान पहुंचा रहा है। सिगल यूज प्लास्टिक को बैन किया जाना सरकार का सकारात्मक कदम है। इसके बिक्री और भंडारण पर भी रोक लगानी चाहिए।

Posted By: Jagran

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