समस्तीपुर । वर्षो की जी-तोड़ मेहनत और उससे मिली सफलता पर उस समय ग्रहण लग जाता है, जब बच्चे और अभिभावक शिक्षा लोन के लिए विभिन्न बैंकों के सामने महीनों गिड़गिड़ाते हैं। एक-दो महीने की कसरत के बाद भी लोन मिल जाए ऐसे भाग्यशाली छात्र कम ही हैं पटोरी में। होता तो यह है कि कभी-कभी छह माह तक दौड़ने के बाद भी लोन नहीं मिलता और छात्र कर्ज लेकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर होते हैं। यह कर्ज महाजनों को उनके अभिभावक सूद समेत चुकाने के लिए कमरतोड़ मजदूरी करते हैं। बैंकों के द्वारा शिक्षा लोन के आवंटन की स्थिति को लेकर दैनिक जागरण द्वारा की गई पड़ताल में कई तथ्य उभरकर सामने आए।

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परेशानी के कारण कम हुई लोन आवेदकों की संख्या

जानकारी के अनुसार, पिछले एक वर्ष में काफी कम छात्रों को लोन दिया गया। आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक वर्ष में एसबीआइ की शाखा से स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड द्वारा 14 छात्रों और सामान्य प्रक्रिया में 22 छात्रों को शिक्षा लोन दिया गया, जबकि पीएनबी से पिछले एक वर्ष में सिर्फ तीन छात्रों को ही यह लोन प्रदान किया गया। इन दोनों बैंकों में कई आवेदकों के आवेदन भी रद्द किए गए। बैंकों के द्वारा लोन के आवंटन में बेवजह विलंब के कारण कई लोगों ने लोन की जगह कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाना ज्यादा आसान समझा। पिछले कई वर्षों के आंकड़े से यह पता चला है कि अब पूर्व की तुलना में आधे लोग भी शिक्षा लोन के लिए आवेदन नहीं करते।

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छह माह लग जाते हैं राशि मिलने में

पटोरी के कई ऐसे आवेदक हैं जिन्हें बैंक से शिक्षा लोन मिलने में छह माह तक लग गए। बाजार के ही संजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने एमबीए में नामांकन के लिए अपने पाल्य के नाम आवेदन दिया था, कितु टालमटोल के कारण काफी विलंब हुआ। अंत में इंदौर के इंस्टीट्यूट ने लोन प्रदान कर दिया। चकसाहो निवासी रमेश बताते हैं कि उन्हें बैंक से लोन लेने में अपना क्लास छोड़कर दौड़ना पड़ा, तब जाकर चार माह के पश्चात लोन मिल सका।

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बिचौलिए के माध्यम से शीघ्र मिलता है लोन

बैंकों द्वारा बेवजह टालमटोल किए जाने के बाद मजबूरन लोग बिचौलिये के चंगुल में फंस जाते हैं। चार लाख के लोन के एवज में बिचौलिये 50 हजार तक की मांग करते हैं। बाद में मोल-जोल कर 25 से 30 हजार की राशि देकर काम करवा लेते हैं और यह काम शीघ्र कर दिया जाता है। चकसीमा निवासी महेश कुमार का कहना है कि उन्हें भी अपने पुत्र की पढ़ाई के लिए बैंक का काफी समय तक चक्कर लगाना पड़ा।

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स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से काम हुआ आसान

कई अभिभावकों और छात्रों ने बताया कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के द्वारा ऑनलाइन आवेदन देकर लोन प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल कर दी गई है। इसके तहत 15 दिनों के अंदर ही लोन प्राप्त हो जाता है, कितु बैंक के माध्यम से मैनुअली आवेदन देने पर बैंक को अप्रूवल के लिए सर्किल ऑफिस भेजना पड़ता है। बाद में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के पश्चात ही लोन मिल पाता है। तब तक छात्र अपने-अपने कॉलेज चले जाते हैं और अगली छुट्टी में आने के बाद ही लोन प्राप्त हो पाता है।

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चार लाख से कम के लोन पर भी करना पड़ता है मॉर्गेज

कई अभिभावक व छात्रों ने बताया कि कम राशि का लोन लेने में भी उन्हें मॉर्गेज करना पड़ता है। इसके तहत बैंकों में निवेश या भूमि और मकान का कागजात वारंटी के रूप में जमा करनी पड़ती है। इससे अभिभावकों को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है।

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बैंक से लोन लेना है टेढ़ी खीर

चकसाहों निवासी गुरुबंधु का मानना है कि उसे छह माह तक दौड़ने के बाद भी जब लोन नहीं मिला तो किसी प्रभावशाली आदमी से मदद लेनी पड़ी। चकसीमा का विकास बताता है कि उसे लोन लेने के लिए कई बार कक्षा छोड़कर बैंक आना पड़ा। वहीं पटोरी के शिव कुमार बताते हैं कि वे अपने बच्चे को इंजीनियरिग कॉलेज में दाखिला इसलिए कर्ज लेकर दिलवाया कि बैंक से समय रहते लोन नहीं मिल सका।

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नहीं चुकाई जा रही लोन की राशि

पटोरी स्थित एसबीआइ के शाखा प्रबंधक रंजन नागवंशी ने बताया कि लोन दिए जाने के पश्चात लौटाने का भी प्रावधान है। यह कक्षा समाप्त होने के एक वर्ष बाद या नौकरी मिलने के छह माह बाद से किस्त द्वारा जमा किया जाता है। कितु कई ऐसे लोन धारक हैं जो तीन वर्ष बीत बाद भी लोन का किस्त नहीं चुका रहे।

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यदि सभी कागजात की जांच हो जाए और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली जाए तो शिक्षा लोन 15 दिनों के अंदर दे दिए जाते हैं।

-संतोष कुमार दत्ता, शाखा प्रबंधक, पीएनबी पटोरी।

Posted By: Jagran

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