बिहार में अनोखा मंदिर, जहां मां दुर्गा की मूर्ति नहीं समाधि की होती है पूजा, विदेश से भी आते हैं भक्त
Samastipur Maa Sati Temple : बिहार के समस्तीपुर में एक अनोखा मंदिर है जहां मां दुर्गा की प्रतिमा की बजाय ...और पढ़ें

समस्तीपुर जिले में कल्याणपुर के ध्रुवगामा स्थित माता सती स्थान। जागरण
HighLights
समस्तीपुर में मां सती की समाधि की पूजा होती है।
यह स्थल 600 साल पुरानी लोककथा से जुड़ा है।
नेपाल सहित दूर-दराज से श्रद्धालु मन्नत मांगने आते हैं।
संवाद सहयोगी, कल्याणपुर (समस्तीपुर)। Bihar Unique Temple : नवरात्र में आपने मां दुर्गा के ऐसे कई मंदिरों के दर्शन किए होंगे, जहां माता की भव्य प्रतिमा स्थापित होती है। लेकिन बिहार के समस्तीपुर में एक ऐसा धाम भी है, जहां प्रतिमा नहीं, समाधि की पूजा होती है।
इस स्थान से जुड़ी करीब छह सौ साल पुरानी लोककथा और आस्था की परंपरा इसे खास बनाती है। यहां मां सती के दर्शन और मन्नत मांगने के लिए दूर-दराज के इलाकों के साथ नेपाल से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
ध्रुवगामा स्थित मां सती स्थान श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र
शारदीय नवरात्र में चारों ओर मां दुर्गा की आराधना की धूम मची है। मंदिरों में पूजा-अर्चना के बीच प्रखंड से करीब पांच किलोमीटर दूर ध्रुवगामा स्थित मां सती स्थान श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है।
इस स्थल की खासियत है कि यहां देवी की प्रतिमा की बजाय मां सती की समाधि की पूजा की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान से जुड़ी प्राचीन लोककथा और मनोकामना पूरी होने के विश्वास के कारण विभिन्न जिलों के अलावा नेपाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
गांव की बहू-बेटियों को आशीर्वाद दिया और फिर चिता पर चली गईं
मां सती स्थान का इतिहास वर्ष 1430 ईस्वी से जुड़ा है। मान्यता है कि अगहन शुक्ल सप्तमी, मंगलवार को गांव निवासी गतिराम सिंह की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी चंद्रावती ने स्थानीय लोगों के मना करने के बावजूद भी पति की चिता के साथ समाधि ले ली।
बताया जाता है कि उन्होंने सोलह श्रृंगार कर गांव की बहू-बेटियों को आशीर्वाद दिया और फिर चिता पर चली गईं। लोगों के बीच प्रचलित इस कथा ने कालांतर में इस स्थल को विशेष धार्मिक पहचान दी। इसी कारण गांव का दूसरा नाम गतिरामनगर भी कहा गया।
मां सती के समाधि स्थल को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। इसी विश्वास के साथ महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग समाधि स्थल पर पहुंचकर परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।
मनोकामना पूरी होने पर भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर माथा टेकते हैं। स्थानीय लोगों के लिए मां सती स्थान केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि गांव की आस्था और परंपरा का प्रतीक भी है।
मां सती स्थान परिसर में मां काली, माता पार्वती, मां दुर्गा, भगवान हनुमान और भोलेनाथ के मंदिर भी स्थापित हैं। विभिन्न पर्व-त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। नवरात्र के दौरान देवी आराधना के बीच इस स्थल की धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
