समस्तीपुर की थमी रफ्तार को इन 2 पुलों ने दी संजीवनी, नीतीश और रामनाथ का पुराना फैसला आज बना वरदान
मुख्य आरओबी बंद होने से समस्तीपुर में यातायात संकट गहरा गया है, लेकिन दो फुट ओवरब्रिज (FOB) शहर की असली ...और पढ़ें

HighLights
मुख्य आरओबी बंद होने से समस्तीपुर में यातायात संकट।
माधुरी चौक और थानेश्वर स्थान एफओबी बने लाइफलाइन।
इन पुलों से शहर की कनेक्टिविटी बनी हुई है।
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। समस्तीपुर को मिथिलांचल से जोड़ने वाले मुख्य ओवरब्रिज (आरओबी) के बंद हो जाने के बाद शहर में यातायात का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
इस मुश्किल घड़ी में शहर के एक छोर से दूसरे छोर को जोड़ने के लिए दो फुट ओवरब्रिज (एफओबी) आज आम लोगों के लिए असली ''लाइफलाइन'' साबित हो रहे हैं। इन दोनों पुलों के सहारे ही लोग पैदल और बाइक से किसी तरह अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं।
अगर सालों पहले दूरदर्शिता दिखाते हुए इन दोनों पुलों का निर्माण नहीं कराया गया होता, तो आज शहर के दोनों तरफ की आबादी का जिला मुख्यालय से पूरी तरह संपर्क भंग हो जाता।
इन दो पुलों पर टिका है शहर का आवागमन
वर्तमान में शहर की लाइफलाइन बने इन पुलों में पहला माधुरी चौक एफओबी है और दूसरा थानेश्वर स्थान एफओबी। थानेश्वर स्थान एफओबी का निर्माण वर्ष 2004-2005 के बीच हुआ था। इस पुल को धरातल पर उतारने का पूरा श्रेय समस्तीपुर के तत्कालीन विधायक व वर्तमान राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर के प्रयासों को जाता है।
माधुरी चौक एफओबी का निर्माण वर्ष 2011-12 के बीच हुआ था। इस पुल के निर्माण के पीछे ''रेल विस्तार विकास मंच'' के संयोजक शत्रुघ्न पंजी का निरंतर संघर्ष और उस समय के सांसद महेश्वर हजारी के प्रयास ने रंग लाया। तबके डीआरएम अरूण मल्लिक ने इस कार्य को व्यक्तिगत अभिरूचि लेकर कराया।
रामनाथ ठाकुर की मांग पर नीतीश कुमार ने लिया था एक्शन
थानेश्वर स्थान एफओबी के निर्माण की कहानी साल 2002 से जुड़ी है। उस समय तत्कालीन रेलमंत्री नीतीश कुमार समस्तीपुर में डीजल शेड निर्माण को लेकर स्थल निरीक्षण और राशि आवंटित करने के उद्देश्य से यहां आए थे। वहां एक सभा हो रही थी।
उस समय मंच पर रेलवे के अधिकारियों के अलावा समता पार्टी जिलाध्यक्ष दुर्गेश राय, विधायक अश्वमेध देवी भी थी। उसी दौरान ''टूनटूनिया गुमटी'' के बंद हो जाने से शहर में आवागमन की भारी समस्या खड़ी हो गई थी।
तत्कालीन विधायक रामनाथ ठाकुर ने इस जनसमस्या को रेलमंत्री के सामने पुरजोर तरीके से उठाया। उनकी मांग की गंभीरता को देखते हुए रेलमंत्री नीतीश कुमार ने मंच से ही महाप्रबंधक को बुलाकर इस दिशा में अविलंब कदम उठाने का निर्देश दिया था।
2005 में खुला था रास्ता, आज बन गया संकटमोचक
प्रयासों का नतीजा यह हुआ कि साल 2005 में थानेश्वर स्थान एफओबी को पहले पैदल यात्रियों के लिए खोला गया और बाद में बढ़ती जरूरत को देखते हुए इसे बाइक चालकों के लिए भी शुरू कर दिया गया। आज जब मुख्य आरओबी बंद है, तब सालों पहले किए गए ये प्रयास समस्तीपुर के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।
