समस्तीपुर में खेती से जुड़ी 8 योजनाओं के लिए आवेदन शुरू, किसानों की बढ़ेगी आमदनी
समस्तीपुर के किसानों के लिए डीबीटी पोर्टल पर खेती से जुड़ी आठ योजनाओं में ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। ...और पढ़ें

समस्तीपुर में खेती से जुड़ी 8 योजनाओं के लिए आवेदन शुरू, किसानों की बढ़ेगी आमदनी (AI Generated Image)
HighLights
डीबीटी पोर्टल पर आठ कृषि योजनाओं के लिए आवेदन शुरू।
ड्रोन से छिड़काव, प्रसंस्करण इकाइयों से बढ़ेगी किसानों की आय।
पात्रता जांच कर किसान समय पर ऑनलाइन आवेदन करें।
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। खेती की बढ़ती लागत के बीच जिले के किसानों के लिए राहत और आमदनी बढ़ाने का एक और रास्ता खुला है। कृषि विभाग ने डीबीटी पोर्टल पर किसानों और कृषि से जुड़े उद्यमियों के लिए आठ योजनाओं में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।
जिले के किसानों ने इन योजनाओं के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है। इन योजनाओं में ड्रोन से छिड़काव, कीटनाशी स्टाक एंटी, तेल प्रसंस्करण, इकाई, खरीफ डीजल अनुदान, दाल प्रसंस्करण इकाई, पक्का वर्मी कंपोस्ट इकाई, गोबर गैस संयंत्र व व्यावसायिक वर्मी कंपोस्ट उत्पादन इकाई शामिल है।
कृषि में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए ड्रोन से छिड़काव व उपादान कार्यक्रम चलाया जा रहा है। ड्रोन के माध्यम से फसलों पर निर्धारित कृषि उपादानों का छिड़काव कम समय में किया जा सका है। इससे श्रम की जरूरत और छिड़काव में लगने वाला समय कम होने की संभावना है।
जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सुमित सौरभ ने बताया कि डीबीटी पोर्टल पर संचालित योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। किसान अपनी पात्रता के अनुसार, योजनाओं का लाभ लेने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन से पहले दस्तावेज की जांच जरूरी:
किसानों को किसी भी योजना में आवेदन करने से पहले उसकी पात्रता, अनुदान की शर्त, जरूरी दस्तावेज और आवेदन की अंतिम तिथि की जानकारी लेनी चाहिए। डीबीटी पोर्टल पर आवेदन के दौरान सही जानकारी देना जरूरी है।
कीटनाशी स्टाक की ऑनलाइन निगरानी:
कृषि विभाग ने कीटनाशी स्टॉक एंट्री की व्यवस्था भी ऑनलाइन की है। इसका उद्देश्य कीटनाशकों की उपलब्धता से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित रखना और उनकी आपूर्ति की निगरानी को बेहतर बनाना है।
ऑनलाइन व्यवस्था से विभाग को कीटनाशी स्टाक की स्थिति की जानकारी रखने में सुविधा होगी और आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
