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RPCAU पूसा में जुटेंगी देश भर की हस्तियां, कृषि में एआई और रोबोटिक्स के उपयोग पर होगी चर्चा

Published: Sat, 03 Oct 2026 01:13 PM (IST)

RPCAU Samastipur Digital Agriculture: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में 5 और 6 अक्टूबर 2026 को डिजिटल कृषि पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित होगी।

डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर । सौ. विश्वविद्यालय

डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर । सौ. विश्वविद्यालय

HighLights

  1. RPCAU पूसा में डिजिटल कृषि पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला।

  2. AI, IoT, ड्रोन जैसी तकनीकों का खेती में एकीकरण मुख्य लक्ष्य।

  3. छोटे किसानों को डिजिटल सप्लाई चेन से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।

जागरण संवाददाता, पूसा (समस्तीपुर)। RPCAU Samastipur Digital Agriculture: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU) पूसा में 'विकसित भारत @2047' के तहत डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

विश्वविद्यालय के विद्यापति सभागार में 05 एवं 06 अक्टूबर 2026 को इस कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रोपड़ और अन्नम.एआई के विशेष सहयोग से हो रहा है।

स्मार्ट फार्म समृद्ध किसान

कार्यशाला का मुख्य विषय "स्केल-आधारित डिजिटल कृषि को अपनाने के लिए रणनीतिक रोडमैप तैयार करना" तय किया गया है। इस राष्ट्रीय आयोजन का मूल मंत्र "स्मार्ट फार्म, समृद्ध किसान, विकसित भारत" रखा गया है। इसमें देश भर से कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्माता, एग्री-स्टार्टअप उद्यमी, छात्र और प्रगतिशील किसान हिस्सा लेंगे।

तकनीकों के एकीकरण पर बल

कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने बताया कि इसका उद्देश्य पारंपरिक खेती में एआई, आईओटी, ड्रोन, जीआईएस, बिग डेटा और रोबोटिक्स को तेजी से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए कृषि क्षेत्र को स्मार्ट और डिजिटल बनाना अनिवार्य है।

यह कार्यशाला एक प्रभावी रोडमैप तैयार करेगी ताकि छोटे किसानों को सीधे डिजिटल सप्लाई चेन से जोड़ा जा सके।

चार प्रमुख विषयों पर चर्चा

विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य की खेती के लिए नवाचार और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के आयोजन सचिव ने बताया कि पूरी कार्यशाला को चार प्रमुख विषयों में विभाजित किया गया है। इसमें प्रिसिजन कृषि, जलवायु लचीलापन और ड्रोन तकनीक पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

कीट पूर्वानुमान और प्रबंधन

कार्यशाला में एआई आधारित कीट-रोग पूर्वानुमान, जैविक खेती, उद्यानिकी और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं।

इसके अलावा एग्रीबिजनेस और डिजिटल सप्लाई चेन के सुदृढ़ीकरण पर भी विशेष सत्र आयोजित होंगे। इन आधुनिक तकनीकों से प्राकृतिक संसाधनों का दक्ष उपयोग होगा और पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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