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महिला केंद्रित नीतियों और तकनीक से कृषि खाद्य प्रणालियों में बढ़ेगी आधी आबादी की भूमिका

Published: Sat, 27 Jun 2026 05:14 PM (IST)

Pusa Agriculture Conference: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ, जिसका विषय ...और पढ़ें

राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ के मौके पर उपस्थित कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद, व प्रगतिशील किसान। फोटो सौ: विवि प्रशासन

राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ के मौके पर उपस्थित कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद, व प्रगतिशील किसान। फोटो सौ: विवि प्रशासन

HighLights

  1. कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर राष्ट्रीय सम्मेलन।

  2. सतत कृषि विकास हेतु महिला सशक्तिकरण पर विशेषज्ञों का जोर।

  3. महिला केंद्रित नीतियों, तकनीक और प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई गई।

जागरण संवाददाता, पूसा (समस्तीपुर)। Women In Agriculture: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन (INSEE) के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।

सम्मेलन का विषय 'कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को पुनर्परिभाषित करना : सतत कृषि विकास के लिए विस्तार रणनीतियां' है। देशभर से पहुंचे कृषि वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और प्रगतिशील किसानों ने कृषि में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तीकरण पर विचार-विमर्श किया।

महिलाओं को मुख्यधारा में लाने पर जोर

उद्घाटन सत्र में आयोजन सचिव एवं स्कूल ऑफ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. राम दत्त ने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान लंबे समय से पर्याप्त पहचान नहीं पा सका है। अब समय आ गया है कि उनके योगदान को उचित मान्यता मिले और उन्हें कृषि विकास की मुख्यधारा में स्थान दिया जाए।

सतत कृषि विकास के लिए सशक्तीकरण जरूरी

अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना सतत कृषि विकास का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

Pusa agriculture college samastipur 1

मुख्य अतिथि जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो. (डॉ.) पी.के. बाजपेयी ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं वर्षों से कृषि व्यवस्था की मजबूत आधारशिला रही हैं। अब उन्हें केवल खेतों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में भी समान भागीदारी मिलनी चाहिए।

आधुनिक तकनीक और बाजार तक पहुंच महत्वपूर्ण 

भारत सरकार के योजना आयोग के पूर्व कृषि सलाहकार एवं INSEE के उपाध्यक्ष डॉ. वी.वी. सदामते ने कहा कि महिलाओं तक ऋण, आधुनिक तकनीक और बाजार की सीधी पहुंच सुनिश्चित किए बिना सतत कृषि विकास संभव नहीं है। उन्होंने महिला केंद्रित कृषि नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया।

वहीं, यूएएस बेंगलुरु के पूर्व कुलपति एवं INSEE के अध्यक्ष डॉ. के. नारायण गौड़ा ने महिला किसानों तक कृषि विज्ञान और तकनीक पहुंचाने को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने महिला प्रसार कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाने और स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी मंच से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

किसान चाची का प्रशिक्षण पर बल

विशेष संबोधन में पद्मश्री सम्मानित 'किसान चाची' राजकुमारी देवी ने कहा कि गांवों में महिलाएं खेती का अधिकांश कार्य करती हैं, लेकिन पहचान अक्सर पुरुषों को मिलती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से जुड़ने पर महिलाएं न केवल स्वयं सशक्त होती हैं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सम्मेलन के दौरान स्मारिका और शोध सार का विमोचन किया गया। कृषि विस्तार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशेषज्ञों को INSEE Awards से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय को 'मैन ऑफ एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित किया गया।

तीन दिनों तक तकनीकी सत्र

सम्मेलन के दौरान अगले तीन दिनों तक महिला उद्यमिता, जलवायु अनुकूल खेती, डिजिटल कृषि प्रसार और कृषि नवाचार जैसे विषयों पर विशेषज्ञ अपने शोध और अनुभव साझा करेंगे।