समस्तीपुर। वारिसनगर, प्रखंड मुख्यालय स्थित मत्स्यजीवी कार्यालय पर दैनिक जागरण की ओर से आयोजित चुनावी चौपाल में क्षेत्र के दर्जनों लोगों ने भाग लिया। घंटों चले इस चौपाल में लोगों ने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर जमकर भड़ास निकाली। इसका कारण भी उन्होंने स्वयं को बताते हुए चुनाव के वक्त जात-पात में पड़े व्यक्तित्व पर ध्यान नहीं देकर मतदान करना बताया।

वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र का पूरा हिस्सा ग्रामीण इलाका है। सिर्फ मथुरापुर पंचायत जिला से करीब होने के कारण शहरी क्षेत्र में परिणत हो गया है। यह क्षेत्र अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए आज भी मोहताज है। पहले यह रोसड़ा विधानसभा के अंतर्गत आता था। गत चुनाव में परिसीमन बदलने के बाद यह समस्तीपुर विधानसभा का अंग बन गया है। परिसीमन बदला, क्षेत्र बदला, परंतु यहां की समस्याएं अब भी है जस की तस है। वारिसनगर विधानसभा में वारिसनगर के 20, खानपुर के 19 तथा शिवाजीनगर के 6 पंचायतों की सुध लेने वाले प्रतिनिधि की आज भी लोगों को दरकार है। पूरे क्षेत्र में पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिचाई, जलनिकासी, सड़क यातायात की समस्याएं इस कदर मुंह बाएं खड़ी है कि क्षेत्र का विकास नहीं हो पा रहा है। आज भी यहां के लगभग सौ गांव ऐसे हैं जहां के लोग बिजली का दर्शन नहीं कर सके हैं। कई गांवों की आबादी पगडंडियों पर चलती है। शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट के कारण पढा़ई के लिए लोग बच्चों को बाहर भेजने पर मजबूर हैं। बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिलने से क्षेत्र के अधिकांश युवा दूसरे प्रदेशों में जा रहे हैं। पूरे क्षेत्र के 90 प्रतिशत राजकीय नलकूप बंद पड़े हैं। जहां चल भी रहें हैं, वहां नाला के अभाव में सिचाई बाधित है। लगभग 90 प्रतिशत से अधिक चापाकल खराब हो चुके हैं। चौपाल में मौजूद सुमित्रा देवी का कहना था कि सांसद पांच वर्षों के कार्यकाल में मात्र तीन बार क्षेत्र में आए हैं। दो बार समारोह में तो एक बार कार्यकर्ता सम्मेलन में। ललित पासवान ने प्रखंड मुख्यालय चौक पर जलनिकासी की व्यवस्था बहाल करने की आवश्यकता जतायी। जबकि हरेराम सहनी ने पेयजल की समुचित व्यवस्था क्षेत्र में करने की मांग की। मो. मसकूर ने शिक्षा की समुचित व्यवस्था कर आने वाली पीढ़ी को काबिल बनाने की बातें कही। इसके अलावा अशोक सहनी, महेश सहनी, लालबाबू सहनी, बेबी देवी, रामप्रीत सहनी, नजरूल होदा, अमरजीत सहनी आदि ने काम करने वाले और क्षेत्र में आकर विकास को गति देने वाला सांसद को चुनने की बातें कही। अंत में सबों ने एक स्वर से स्वयं तथा परिवार के लोगों को मतदान में भाग लेकर चुनावी महापर्व को सफल बनाने का संकल्प लिया। कहते हैं लोग

मछुआरों को अबतक मात्र ठगने का काम किया गया है। मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा, मछुआरों को एससी- एसटी का दर्जा देने का वादा कर मात्र छलने का काम किया गया है।

राजेश सहनी, जिलाध्यक्ष मत्स्यजीवी सहकारी संघ विधानसभा क्षेत्र के लगभग ऐसे 100 गांव हैं जहां के लोगों को बिजली का दर्शन अबतक नसीब नहीं हो पाया है। कई गांवों में तो बिजली का पोल भी नहीं पहुंच पाई है। जहां बिजली पहुंची भी है तो वहां पूरे गांव को आपूर्ति नहीं की जा रही है।

शंकर चौधरी, बसंतपुर रमणी विधानसभा क्षेत्र के प्राय: सभी विद्यालयों में शिक्षकों और मूलभूत संरचना की कमी है। शिक्षकों की कमी के कारण यहां के छात्र ट्यूशन पर निर्भर रहते हैं या क्षेत्र से बाहर जाकर पढ़ाई करते हैं। हाई स्कूलों की स्थिति तो और भी बदतर बनी हुई है।

जोहरा खातून, बरियारपुर इस विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मथुरापुर में बूढ़ी गंडक नदी पर के पुल से मुक्तापुर गुमटी तक की सड़क उत्तर बिहार से प्रदेश को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस सड़क की स्थिति यह है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार तो जिला से दरभंगा रेफर होने वाले मरीज इस जाम में अपनी जान गंवा चुके हैं।

शिवशंकर महतो, उपप्रमुख इस विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मुक्तापुर स्थित बाजार समिति उत्तर बिहार के लिए मसाला का सबसे बड़ा बाजार है। यहां से करोड़ों का व्यवसाय महीनों में होता है। परंतु बाजार समिति परिसर में एक अदद अच्छी सड़क भी नहीं है।

रामा साह, प्रखंड प्रमुख सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित होने तथा तालाब-पोखर में पानी सूख जाने के बावजूद सरकारी राजस्व की माफी नहीं होना काफी चिता का विषय है।

रूपा सहनी, मंत्री मछुआ संघ

Posted By: Jagran

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