समस्तीपुर। शाहपुर पटोरी : स्वतंत्र भारत की इमारत खड़ा करने वाले इस गांव की जिंदगी आज भी पगडंडियों पर रेंगती है। पूरे विश्व में शिक्षा का परचम लहराने वाले इस गांव के नौनिहालों को उच्च शिक्षा आज भी नसीब नहीं। कभी-कभी ऐसे सवाल नशतर की तरह जोड़पुरावासियों के जेहन में चुभते हैं। विकास की बयार यहां भी चलेगी। अच्छी सड़कें, चकाचक बिजली, बेहतर अस्पताल, उच्च शिक्षा का प्रबंध, स्वच्छ पेयजल आदि की व्यवस्था यहां भी लोगों को नसीब होगी, ऐसी उम्मीद अभी भी गांववासियों को है। लोगों ने चिल्ला-चिल्लाकर अपनी मांगे उठाई, सदन तक की दीवारें इसकी गवाह है लेकिन, व्यवस्था के साथ-साथ प्रतिनिधि भी मौन रहे, इसके हजारों प्रत्यक्षदर्शी भी हैं। समस्तीपुर-पटोरी मुख्य मार्ग के किनारे बसे इस पंचायत की लगभग साढ़े आठ हजार लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। साढ़े पांच हजार एकड़ में फैले इस पंचायत की चार हजार एकड़ की भूमि में खेती होती है, किन्तु लोगों को इंतजार है, ऐसे प्रतिनिधि जो इस गांव का वर्षों पुराना हक दिला सके। पानी के बगैर सूख रहा हलक

गांव में पेयजल की समस्या आज भी गंभीर है। पिछले कुछ वर्षों के अंदर पीएचईडी के द्वारा तीन दर्जन चापाकल लगाये गये। जिसमें आज एक भी दुरूस्त नहीं है। 4-5 चापाकलों को लोगों को अपने खर्चे से दुरूस्त कराया है। नल-जल योजना के तहत पेयजल के लिए इस पंचायत में कार्य स्पष्ट दिखाई दे रहा है किन्तु इसमें निर्धारित समय तक ही जलापूर्ति की जा रही है। नतीजा यह है कि लोग पीने के पानी की व्यवस्था अपने स्तर से करते हैं। महादलितों को मयस्तर नहीं हो सकी सड़क

पंचायत में वार्ड 10, 4 और इसके अतिरिक्त अन्य जगहों पर स्थित महादलितों टोलों में आज तक सड़क नहीं बन सकी। सड़क की न तो जमीन है और न राशि। मालपुर के बांतर टोली में सर्वे कराया गया किन्तु निर्माण कार्य आरम्भ नहीं हो सका। एक ओर सरकार इन बस्तियों को पक्की सड़क और इंटरलॉकिग टाईल्स द्वारा मुख्य सड़क से जोड़ने की योजना बना चुकी है, किन्तु इसका फायदा लोगों नहीं मिल सका। बीमार है स्वास्थ विभाग

भूमि उपलब्ध कराते ही बनेगा अस्पताल, ऐसी घोषणा के बाद पंचायत के मुखिया ब्रजनंदन चैधरी ने अस्पताल के लिए तीन वर्ष पूर्व अपनी जमीन की रजिस्ट्री कर दी। किन्तु अबतक वहां अस्पताल नहीं बन सका। इसके लिए सदन तक आवाज उठायी गई। एक स्वास्थ उपकेन्द्र खुद अव्यवस्था का शिकार है। यहां डाक्टर उपलब्ध नहीं रहते, दवा तो भगवान भरोसे। सरकारी सिचाई नदारद

लगभग साढे़ पांच एकड़ कृषि योग्य भूमि पर सरकारी सिचाई की व्यवस्था शून्य है। यहां एक भी सरकारी नलकूप नहीं है। यहां के लोगों की खेती रामभरोसे होती है। काफी अधिक पैमाने पर यहां की भूमि या तो सालों भर जलजमाव रहता है या फिर सूखे के कारण फसल नष्ट हो जाती है। जल जमाव की समस्या से निजात दिलाने के लिए नून नदी परियोजना आज तक पूरी नहीं की जा सकी। नहीं है उच्च शिक्षा का इंतजाम

गांव में दो मध्य विद्यालय और चार प्राथमिक विद्यालय अवस्थित है किन्तु उच्च शिक्षा का कोई इंतजाम यहां नहीं है। अभी भी एक विद्यालय ऐसा है जहां भवन नहीं है। यहां के छात्र ब्रह्मस्थान की जमीन में खुले आकाश के नीचे पढ़ते हैं। विद्यालय के लिए जमीन भी उपलब्ध नहीं है। उच्च शिक्षा के लिए यहां के छात्र काफी दूर स्थित अन्य विद्यालयों में जाकर अध्ययन करते हैं। इन्हें भी है अव्यवस्था का दर्द

- गांव के ही सच्चिदानन्द चैधरी, रामलगन सदा, नथुनी मांझी, अशोक कुमार झा करते हैं कि अबतक किसी भी प्रतिनिधि ने क्षेत्र में रजिस्ट्री ऑफिस खोलवाने की वकालत नहीं की है।

- भोला मांझी, राजकुमार झा, मुकेश कुमार ने बताया कि गांव में रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण मजदूरों का प्रतिवर्ष पलायन हो रहा है।

- अंजन कुमार चैधरी, रंजीत चैधरी, रविरंजन बताते हैं कि चैर से जल निकासी की समस्या पर ध्यान किसी भी प्रतिनिधि को नहीं गया, जो किसानों की प्रमुख समस्या है।

- रेणु देवी, पुनर्वासी देवी, भोलिया देवी बताती है कि प्रतिनिधि के द्वारा सिर्फ चुनाव के समय ही दौरा किया जाता है, शेष दिनों में उनका दर्शन भी नहीं होता। एक नजर में गांव - जनसंख्या - 10100

- वार्ड की सं. - 10

- मतदाता - 5472

- बीपीएल परिवार - 1510

- एपीएल परिवार - 720

- मध्य विद्यालय - 2

- प्राथमिक विद्यालय - 6

- पंचायत भवन - 1

- सामुदायिक भवन - 1

- उपस्वास्थ्य केंद्र - 1 बयान

पंचायत को आदर्श पंचायत बनाने की तमन्ना है अपने स्तर से विभिन्न सरकारी योजनाओं व ग्राम पंचायत की योजनाओं का पूरा लाभ पंचायत को दिलाया गया। पंचायत को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है।

सरोज देवी, मुखिया, जोड़पुरा

Posted By: Jagran

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