समस्तीपुर के पहले ग्रामीण SP मुकुल कुमार रंजन ने संभाली कमान, 17 थानों की होगी जिम्मेदारी
मुकुल कुमार रंजन ने समस्तीपुर के पहले ग्रामीण एसपी के रूप में कार्यभार संभाला। वे जिले के 17 ग्रामीण थानों ...और पढ़ें

समस्तीपुर के पहले ग्रामीण SP मुकुल कुमार रंजन ने संभाली कमान, 17 थानों की होगी जिम्मेदारी
HighLights
मुकुल कुमार रंजन समस्तीपुर के पहले ग्रामीण एसपी बने।
17 ग्रामीण थानों की निगरानी करेंगे, अपराध नियंत्रण पर जोर।
एसएसपी के नियंत्रण में कार्य करेंगे, पुलिस व्यवस्था मजबूत होगी।
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। जिले में ग्रामीण पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में नई पहल शुरू हो गई है। मुकुल कुमार रंजन ने सोमवार को समस्तीपुर के पहले ग्रामीण एसपी के रूप में कार्यभार संभाल लिया।
पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने पुलिस कार्यालय से जुड़े विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया और जिले की मौजूदा पुलिस व्यवस्था की जानकारी ली। इससे पहले सर्किट हाउस में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
कार्यभार संभालने के बाद ग्रामीण एसपी ने एसएसपी अरविंद प्रताप सिंह के साथ बैठक की। इसमें अपराध नियंत्रण, विधि-व्यवस्था बनाए रखने, लंबित कांडों की समीक्षा और अनुसंधान की स्थिति सहित पुलिसिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
मुकुल कुमार रंजन इससे पहले पटना में पुलिस अधीक्षक (विधि-व्यवस्था) के पद पर कार्यरत थे। गृह विभाग ने उन्हें समस्तीपुर में ग्रामीण एसपी की जिम्मेदारी सौंपी है।
17 थानों की गतिविधियों पर रखेंगे नजर:
नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण एसपी के जिम्मे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 17 थानों की निगरानी होगी। इसमें रोसड़ा अनुमंडल के आठ, दलसिंहसराय के पांच और पटोरी अनुमंडल के चार थाने शामिल हैं।
ग्रामीण एसपी इन थानों में दर्ज मामलों के अनुसंधान, लंबित कांडों की प्रगति और अपराध नियंत्रण से संबंधित कार्यों की समीक्षा करेंगे।
रोसड़ा अनुमंडल के रोसड़ा, सिंघिया, विभूतिपुर, बिथान, हसनपुर, लरझाघाट, हथौड़ी और शिवाजीनगर थाने उनके क्षेत्राधिकार में रहेंगे।
वहीं, दलसिंहसराय अनुमंडल के दलसिंहसराय, विद्यापतिनगर, उजियारपुर, अंगारघाट और घटहो थानों की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई है। पटोरी अनुमंडल के पटोरी, मोहिउद्दीननगर, हलई और मोहनपुर थाने भी इसी व्यवस्था के तहत काम करेंगे।
अनुसंधान में तेजी लाने पर रहेगा जोर:
ग्रामीण एसपी की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में पुलिस प्रशासन की निगरानी को प्रभावी बनाना और थानों के कामकाज की नियमित समीक्षा करना है। इससे लंबित मामलों के निष्पादन, अनुसंधान की गुणवत्ता और अपराध नियंत्रण से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा।
साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में विधि-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदारियों का बंटवारा भी अधिक स्पष्ट होगा। ग्रामीण एसपी को अपने क्षेत्र के दारोगा, सिपाही और हवलदार को निलंबित करने का अधिकार होगा।
हालांकि, पुलिस लाइन में तैनात पदाधिकारियों के निलंबन के मामले में एसएसपी से विमर्श करना आवश्यक होगा। महत्वपूर्ण मामलों और संवेदनशील विषयों की जानकारी भी उन्हें एसएसपी को देनी होगी।
एसएसपी के नियंत्रण में करेंगे काम:
ग्रामीण एसपी का पद स्वतंत्र प्रशासनिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि जिला पुलिस की मौजूदा व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होगा। गृह विभाग के आदेश के अनुसार, यह पद स्टाफ ऑफिसर कोटि के तहत सृजित किया गया है।
ग्रामीण एसपी जिले के एसएसपी के नियंत्रण और पर्यवेक्षण में कार्य करेंगे। इस पद के लिए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) की जिम्मेदारी भी एसएसपी के पास ही रहेगी।
