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लेटकर मोबाइल चलाने से सर्वाइकल का खतरा, समस्तीपुर सदर अस्पताल में बढ़ रहे मरीज

Published: Mon, 14 Sep 2026 01:20 PM (IST)

समस्तीपुर सदर अस्पताल में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग और गलत जीवनशैली के कारण युवाओं और बच्चों में सर्वाइकल, गर्दन व ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। Samastipur Sadar Hospital: बिस्तर पर लेटकर मोबाइल चलाने और पर्याप्त रोशनी के बिना काम करने की आदत लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रही है।

इस गलत जीवनशैली के कारण युवाओं और बच्चों में सर्वाइकल, गर्दन और पीठ दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। समस्तीपुर सदर अस्पताल के फिजियोथेरेपी केंद्र में पहुंच रहे मरीजों में यह बदलाव साफ देखा जा रहा है।

युवाओं की संख्या अधिक

सदर अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक पिछले आठ महीनों में कुल 3515 रोगियों का फिजियोथेरेपी उपचार किया गया है।

इनमें 1560 महिलाएं और 1955 पुरुष शामिल हैं, जिनमें गर्दन, पीठ दर्द और सर्वाइकल से पीड़ित युवाओं की संख्या करीब 70 प्रतिशत दर्ज की गई है।

अस्पताल पर बढ़ा भरोसा

दर्द की इस समस्या के बाद मरीजों में गठिया और कंधा या बांह जकड़न के मामले सबसे अधिक आ रहे हैं।

सदर अस्पताल में फिजियोथेरेपी सुविधाओं के विस्तार और बेहतर इलाज के कारण अब मरीज निजी क्लीनिकों के बजाय सरकारी अस्पताल की आधुनिक सेवाओं पर भरोसा जता रहे हैं।

चिकित्सकों की अहम सलाह

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि फिजियोथेरेपी से शरीर के दर्द और जकड़न को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।

यह चिकित्सा न केवल चोटों और बीमारियों से उबरने में मदद करती है, बल्कि लोगों की शारीरिक गतिशीलता और फिटनेस को भी बेहतर बनाती है।

बदलती जीवनशैली जिम्मेदार

फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. गौरव कुमार के अनुसार, घंटों मोबाइल और लैपटॉप के सामने झुककर बैठने से गर्दन और कमर की रीढ़ पर भारी दबाव पड़ता है।

शुरुआत में हल्का दिखने वाला यह दर्द धीरे-धीरे सर्वाइकल जैसी गंभीर और क्रॉनिक स्थिति का रूप ले लेता है।

कम उम्र में समस्या

डॉक्टरों ने चिंता जताते हुए कहा कि पहले 60 वर्ष की उम्र के बाद दिखने वाली यह बीमारी अब 20 से 35 वर्ष के युवाओं को शिकार बना रही है।

ऐसे में युवाओं को अपने बैठने का सही तरीका (पोश्चर) सुधारने और रोजाना नियमित व्यायाम करने की सख्त जरूरत है।

आधुनिक तकनीक से इलाज

अस्पताल में मरीजों की स्थिति के हिसाब से एक्सरसाइज, इलेक्ट्रोथेरेपी, मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है।

प्रत्येक मरीज की थेरेपी में 30 से 40 मिनट का समय लगता है, जिससे लंबे समय से पीड़ित मरीजों को राहत मिल रही है।