समस्तीपुर। इलाज व व्यवस्था में खामी का वाहक सिर्फ प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थान ही नहीं है। सदर अस्पताल भी उसके साथ कदमताल कर रहा है। शुक्रवार को इंडोर विभाग के बच्चा वार्ड में चिकित्सा के क्रम में एक मासूम बच्ची को हाथ में स्लाइन लगे हुए ही बिना स्ट्रेचर के बाहर निकाल दिया गया। मां ने इंडोर के बच्चा वार्ड से इमरजेंसी वार्ड तक की दूरी मासूम बच्ची को हाथ में स्लाइन लगे रहने पर ही गोद में तय की। जबकि, अस्पताल में स्ट्रेचर उपलब्ध है। वार्ड से बाहर पहुंचाने के क्रम में स्वास्थ्य कर्मी भी थे। बच्ची की मां ने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने उसे स्ट्रेचर की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई। दाहिने हाथ में स्लाइन का बोतल लेकर बच्ची को गोद में लिए बाहर पहुंची। उसे अस्पताल कर्मी द्वारा बाहर एंबुलेंस के लगे रहने के स्थान पर पहुंचा दिया। उसके बाद उसे एंबुलेंस से डीएमसीएच जाने की सलाह दी गई। लेकिन, एंबुलेंस नहीं मिलने की वजह से बच्ची की मां एक हाथ में स्लाइन को बोतल लेकर गोद में लिटा कर दवा काउंटर के समीप फर्श पर बैठ गई। इस बीच उसके पिता एंबुलेंस के लिए टोल फ्री संख्या 102 पर कॉल करने लगे। लेकिन, उन्हें एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली। हालांकि, इसी बीच बच्ची के रोने पर उसकी मां उसे लेकर आपातकालीन वार्ड के बाहर चबूतरा पर बैठ गई। इसी क्रम में आपातकालीन वार्ड में ड्यूटी पर तैनात नर्स की उस पर नजर पड़ी। उसने तुरंत उसे बच्चा वार्ड में पहुंचा दिया। तबीयत बिगड़ने के कारण बच्ची को कराया भर्ती

समस्तीपुर प्रखंड क्षेत्र के कोरबद्धा गांव निवासी सुफियान शाही अपनी एक वर्षीय पुत्री सोफा अंजुम की दस्त से तबीयत बिगड़ने पर उसे लेकर सदर अस्पताल के ओपीडी वार्ड में पहुंचे। जहां पर वार्ड में ड्यूटी कर रहे डॉ. अमरेंद्र नारायण शाही ने उसका इलाज किया। साथ ही, उसे आवश्यक दवा देने के लिए बच्चा वार्ड में भर्ती किया। दवा चलते रहने के क्रम में उसे डीएमसीएच रेफर कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दवा देने के बाद उसे रेफर किया गया था। इस तरह मामला है जांच कराई जाएगी।

Posted By: Jagran

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