बिहार के किसानों के लिए जरूरी अपडेट, जैविक खेती बीच में छोड़ी तो ब्लैकलिस्ट
बिहार सरकार ने समस्तीपुर सहित 10 जिलों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 5.26 करोड़ रुपये की प्रशासनिक ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
10 जिलों में जैविक खेती के लिए 5.26 करोड़ रुपये स्वीकृत।
सी-3 प्रमाणीकरण पर किसानों को प्रति एकड़ 1,500 रुपये अग्रिम अनुदान।
जैविक खेती छोड़ने वाले किसान अन्य सरकारी योजनाओं से होंगे वंचित।
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ अब किसानों से इसकी निरंतरता भी सुनिश्चित कराई जाएगी। समस्तीपुर समेत 10 जिलों में जैविक खेती को विस्तार देने के लिए सरकार ने पांच करोड़, 26 लाख 71 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है।
इसमें समस्तीपुर, पटना, नालंदा, भोजपुर, सारण, वैशाली, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार शामिल है। इन जिलों में किसान उत्पादक समूहों से जुड़े 3,211 किसानों के 3,380.11 एकड़ रकबे में सी-3 प्रमाणीकरण का कार्य कराया जाएगा।
ये वही किसान और खेत हैं, जिन्हें पूर्व में सी-2 प्रमाण पत्र मिल चुका है। जैविक कोरिडोर योजना के तहत चयनित किसानों के खेतों में तृतीय वर्ष यानी सी-3 प्रमाणीकरण कराया जाएगा।
तीन वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले जैविक खेती छोड़ने वाले किसानों का निबंधन नंबर कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर शेष अवधि के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
ऐसे किसानों को कृषि विभाग की दूसरी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलेगा। योजना का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन को प्रमाणित कर बाजार से जोड़ना है।
कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जैविक कोरिडोर योजना का अवधि विस्तार किया है। कृषि विभाग की अपर सचिव कल्पना कुमारी की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।
प्रति एकड़ 1,500 रुपये मिलेगा अग्रिम अनुदान
सी-3 प्रमाणीकरण के तीसरे वर्ष में किसानों को प्रति एकड़ 1,500 रुपये का अग्रिम अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा बिहार राज्य बीज निगम के माध्यम से प्रति एकड़ 5,000 रुपये मूल्य के जैविक इनपुट उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसका लाभ अधिकतम 2.5 एकड़ तक के रकबे के लिए मिलेगा। इस मद में कुल करीब 2.19 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन को प्रमाणित कर बाजार से जोड़ना है।
प्रशिक्षण और दस्तावेजीकरण पर 1.55 करोड़ खर्च
जैविक खेती से जुड़े किसानों और आईसीएस मैनेजर को प्रशिक्षण देने, मिट्टी के नमूने लेने, आनलाइन निबंधन और दस्तावेजीकरण के लिए भी राशि खर्च की जाएगी।
इस मद में प्रति एकड़ 4,613.50 रुपये की दर से करीब 1.55 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं जैविक प्रमाणीकरण के लिए प्रति एकड़ 500 रुपये की दर से 16.90 लाख रुपये खर्च होंगे।
पैकेजिंग और ब्रांडिंग को भी मिलेगा बढ़ावा
योजना में जैविक उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और ब्रांडिंग पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए 10 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
किसानों और संबंधित कर्मियों के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण व कार्यशाला के आयोजन पर 25 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे जैविक उत्पादों को बाजार में अलग पहचान दिलाने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
खेती छोड़ने पर अन्य योजनाओं का लाभ भी होगा बंद
विभाग ने जैविक खेती के प्रति किसानों की प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रावधान किया है। आदेश के अनुसार, यदि कोई किसान या समूह निर्धारित तीन वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले जैविक खेती छोड़ देता है, तो उसका निबंधन नंबर डीबीटी पोर्टल पर शेष अवधि के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
ब्लैकलिस्ट होने के बाद संबंधित किसान को कृषि विभाग की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलेगा। विभाग का मानना है कि इस प्रावधान से योजना में शामिल किसान जैविक खेती की प्रक्रिया को बीच में छोड़ने के बजाय निर्धारित अवधि तक इसे जारी रखेंगे।
