समस्तीपुर । कुसुम पांडेय स्मृति साहित्य संस्थान के तत्वावधान में केन्द्रीय विद्यालय के समीप स्थित कुसुम सदन के प्रांगण में एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें दूर-दूर से बड़ी संख्या में रचनाकार उपस्थित हुए। डॉ. रामेश गौरीश ने उपस्थित सभी रचनाकारों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दी तथा मैथिली के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. नरेश कुमार विकल ने की। संचालन ई. अजीत कुमार सिंह ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में रेलवे के पूर्व राजभाषा अधीक्षक भुवनेश्वर मिश्र मौजूद रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था के अध्यक्ष शिवेंद्र कुमार पांडेय ने अक्टूबर में उत्पन्न हिन्दी साहित्य के मनीषियों महाकवि रमण रंजन सूरीदेव रामेश्वर पोद्दार रघुवीर नारायण शिवानी डॉ. राम विलास शर्मा, नलिन मोहन सान्याल, गणेश शंकर विद्यार्थी, आचार्य नरेन्द्र देव, निदा फाजली आदि के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर विशद चर्चा करते हुए उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किया। साथ ही राष्ट्र निर्माताओं में सरदार वल्लभ भाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री तथा महात्मा गांधी के महान सद्गुणों तथा बलिदान का स्मरण कराते उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्री पांडेय ने अपनी कविता के माध्यम से कहा- नेताओं को ठीक से ठोकें, बजाएं, जगाएं नहीं जगे तो उन्हें विधान सभा से दूर भगाएं। विष्णु कुमार केडिया ने कहा कि दो जहां के बीच सांसों का, इक अंतर है बाकी हमने तो देखी जीवन भर, यही है असली झांकी। कार्यक्रम के मध्य में ओम प्रकाश ओम की कृति ओम का व्योम तथा डॉ. परमानन्द लाभ की कृति महात्मा गांधी के अनुतरित सवाल एवं विजयादशमी का लोकार्पण समवेत रुप से किया गया। इन कृतियों पर डॉ. नरेश कुमार विकल द्वारा विशद समीक्षा भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में नवरात्रि पर्व, देशप्रेम, चुनाव, हास्य व्यंग्य, गजल आदि से संबंधित रचनाएं विशेष रूप से गुदगुदाती रहीं। डॉ. नरेश कुमार विकल, विष्णु कुमार केडिया, डॉ. परमानन्द लाभ, राम लखन यादव, शिवेंद्र कुमार पांडेय, डॉ. अशोक कुमार सिन्हा, ई. अजीत कुमार सिंह, प्रवीण कुमार चुन्नू, डॉ. सुनील कुमार चम्पारणी, अरुण कुमार सिंह, भुवनेश्वर मिश्र, शिवेश प्रकाश, अरविन्द सत्यदर्शी, अशोक अश्क, प्रवीण वत्स, आभा, अनूरंजीता, विजय व्रत कंठ आदि ने खूब मनोरंजन किया। समापन के पूर्व बेलगाम बाजितपुरी के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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