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धुरियान एक्सप्रेस का नया अवतार, LHB कोच के साथ हावड़ा का सफर होगा ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक

Published: Mon, 07 Sep 2026 06:28 PM (IST)

समस्तीपुर से हावड़ा जाने वाली धुरियान एक्सप्रेस को जल्द ही आधुनिक एलएचबी रैक मिलेंगे, जिससे यात्रियों का सफर अधिक सुरक्षित ...और पढ़ें

समस्तीपुर की धुरियान एक्सप्रेस अब एलएचबी रैक के साथ, सफर होगा बेहतर

समस्तीपुर की धुरियान एक्सप्रेस अब एलएचबी रैक के साथ, सफर होगा बेहतर

HighLights

  1. धुरियान एक्सप्रेस को मिलेगा नया एलएचबी रैक।

  2. यात्रियों के लिए सफर होगा अधिक सुरक्षित आरामदायक।

  3. पुराने आईसीएफ रैक की जगह आधुनिक एलएचबी।

जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। समस्तीपुर जंक्शन होकर हावड़ा जाने वाली प्रमुख और पुरानी ट्रेनों में शामिल धुरियान एक्सप्रेस का जल्द ही स्वरूप बदलने वाला है। ट्रेन को आधुनिक एलएचबी रैक से संचालित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। पूर्व रेलवे की ओर से रैक बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वर्तमान में यह ट्रेन पुराने आईसीएफ रैक से संचालित हो रही है। कभी पैसेंजर ट्रेन के रूप में परिचालित होने वाली धुरियान एक्सप्रेस को कुछ वर्ष पहले एक्सप्रेस ट्रेन का दर्जा दिया गया था। भागलपुर के रास्ते हावड़ा जाने वाली यह ट्रेन दशकों से यात्रियों को सेवा दे रही है।

समस्तीपुर जंक्शन से चलने वाली पुरानी ट्रेनों में इसका प्रमुख स्थान है। कई ट्रेनों का स्वरूप और रैक बदल चुका है, लेकिन धुरियान एक्सप्रेस अभी भी पुराने रैक के साथ ही परिचालित हो रही है। अब एलएचबी रैक मिलने के बाद ट्रेन के कोचों की संरचना में भी बदलाव होने की उम्मीद है।

कोलकाता जाने वाले यात्रियों की पसंद:

धुरियान एक्सप्रेस समस्तीपुर और आसपास के यात्रियों के लिए हावड़ा और कोलकाता जाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। लंबे समय से यह ट्रेन यात्रियों की पसंद बनी हुई है। वर्तमान में इसके रैक को उत्कृष्ट रैक के साथ परिचालित किया जा रहा है।

अधिक सुरक्षित और आरामदायक है एलएचबी कोच:

एलएचबी कोच आधुनिक तकनीक से तैयार किए जाते हैं। इनका नाम जर्मनी की कंपनी लिंक हॉफमैन बुश के नाम पर पड़ा है। आईसीएफ कोच की तुलना में एलएचबी कोच अधिक सुरक्षित और आरामदायक माने जाते हैं। इनकी डिजाइन 160 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति के लिए की गई है।

एलएचबी स्लीपर कोच में सामान्यतः 80 बर्थ होती हैं, जबकि आईसीएफ स्लीपर कोच में 72 बर्थ होती हैं। हाइड्रोलिक सस्पेंशन और बेहतर सस्पेंशन प्रणाली के कारण ट्रेन में झटके और कंपन कम महसूस होते हैं, जिससे यात्रियों का सफर अधिक आरामदायक होता है।