समस्तीपुर। जीत का जश्न समाप्त हो चुका है। अब नवनिर्वाचित पार्षद की नजर अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष पद की कुर्सी पर है। बहुमत हो न हो ,अध्यक्ष बनने की इच्छा सबको है। अध्यक्ष न सही कम से कम उपाध्यक्ष की कुर्सी ही मिल जाए। यह इच्छा सब पाले हुए हैं। नवनिर्वाचित पार्षद अपनी इच्छा को किसी न किसी माध्यम से प्रकट कर रहे हैं। सबका अपना-अपना तर्क है और अपने-अपने दावे। कोई जाति को आधार बताकर तो कोई अल्पसंख्यक वोट का हवाला देकर कुर्सी चाहता है। राजनीतिक आकाओं को कोई पूर्व की सेवा की याद दिला रहा है तो कोई पूर्व में किए गए वायदे को। पार्षदों की यह इच्छा शहर के राजनीतिक आकाओं के लिए परेशानी का सबब बन गई है। शहर के चीनी मिल चौक स्थित एक आवास पर लगभग एक दर्जन पार्षद खाने की टेबल पर जुटे थे। अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने की राह तलाशी जा रही थी। लेकिन संख्या बल जुटाना उनके सामने मुश्किल चुनौती थी। स्थानीय विधायक भी इस भोज में मौजूद थे। वर्तमान विधायक का दामन थामने वाले इस बार पार्षद बन गए हैं। अब वे अध्यक्ष बनना चाह रहे हैं। विधायक के समक्ष अपनी इच्छा प्रकट कर चुके हैं। वहीं कहीं पर पार्षदों की चाय चल रही थी। अध्यक्ष की कुर्सी पाने की राह तलाशी जा रही थी। लेकिन बात नहीं बन पा रही थी। संख्या बल की बाधा सबकी राह में रोड़ा अटका रहा है। वहीं कई जातीय तथा सामाजिक संगठन भी निर्वाचित पार्षदों के पक्ष में उतर गए हैं। संगठन अपनी जाति तथा समाज से जुड़े पार्षद को अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं।

Posted By: Jagran

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