बिहार में पशुपालकों के लिए बड़ी राहत, दुधारू मवेशियों के बीमा पर मिलेगी 85% सब्सिडी; सरकार ने दी मंजूरी
बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दुधारू मवेशियों के बीमा की योजना को मंजूरी दी है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक जोखिम से सुरक्षा मिलेगी।

बिहार में पशुपालकों के लिए बड़ी राहत (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
दुधारू मवेशियों के बीमा योजना को सरकार की मंजूरी।
पशुपालकों को बीमा प्रीमियम पर 85% सब्सिडी मिलेगी।
आकस्मिक आर्थिक जोखिम से सुरक्षा, ग्रामीण आय में वृद्धि।
प्रकाश कुमार, समस्तीपुर। राज्य के पशुपालकों के लिए राहत की खबर है। पशुपालकों की आजीविका को सुरक्षित और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दुधारू मवेशियों के बीमा की योजना को स्वीकृति दी है।
डेरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से सात निश्चय-2 के तहत योजना पर दो करोड़ 99 लाख 98 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत सभी वर्गों के पशुपालकों के कुल 11,764 दुधारू मवेशियों का बीमा कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बीमा प्रीमियम अधिकतम तीन हजार
एक मवेशी का अधिकतम बीमित मूल्य 50 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। कुल बीमा प्रीमियम अधिकतम तीन हजार रुपये होगा। इसमें 85 प्रतिशत राशि, अर्थात 2,250 रुपये सरकार अनुदान के रूप में देगी। शेष 15 प्रतिशत यानी 450 रुपये पशुपालक को देना होगा।
बीमा दावों के त्वरित निष्पादन के लिए चार प्रमुख दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। इनमें बीमा कंपनी को दी गई सूचना, पालिसी दस्तावेज, दावा फार्म और पोस्टमार्टम रिपोर्ट शामिल हैं। आवश्यक दस्तावेज जमा होने के बाद 15 दिनों के भीतर दावा राशि का भुगतान करना होगा।
12 प्रतिशत वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज देने का प्रविधान
निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर बीमा कंपनी को 12 प्रतिशत वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज देने का प्रविधान किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से पशुपालकों को आकस्मिक आर्थिक जोखिम से सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण परिवारों की आय को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।
जिला गव्य विकास पदाधिकारी कमलेश कुमार ने बताया कि सात निश्चय-2 के तहत दुधारु पशुओं के बीमा कराने की योजना को स्वीकृति मिली है। पशुपालकों को आकस्मिक आर्थिक जोखिम से सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण परिवारों की आय को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।
पशु की मौत पर मिलेगी आर्थिक सुरक्षा
योजना का उद्देश्य लंपी, एचएसबीक्यू जैसी गंभीर बीमारियों अथवा अन्य कारणों से दुधारू पशुओं की आकस्मिक मृत्यु होने पर पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान से सुरक्षा प्रदान करना है। पशु की मौत की स्थिति में बीमा के माध्यम से निर्धारित शर्तों के अनुसार पशुपालक को आर्थिक सहायता मिल सकेगी। इससे पशुपालकों पर अचानक पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी।
अधिकतम 10 पशुओं तक मिलेगा लाभ
इच्छुक पशुपालक गव्य विकास निदेशालय के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। बीमा के लिए पशु की पहचान सुनिश्चित करने को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) की ओर से जारी 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या वाला ईयर टैग अनिवार्य होगा।
बीमा के समय पशुपालक और ईयर टैग लगे पशु के साथ दो स्पष्ट तस्वीरें भी देनी होंगी। एक लाभुक या एक हाउसहोल्ड को अधिकतम 10 दुधारू पशुओं के बीमा पर ही अनुदान का लाभ मिलेगा।
