समस्तीपुर । रोसड़ा अनुमंडल की 44 वीं वर्षगांठ मंगलवार को धूमधाम से मनाई गई। संध्याकाल रंग-बिरंगे बल्बों एवं मोमबत्तियों की जगमग रोशनी के बीच डीसीएलआर जयचंद्र यादव ने केक काटा। इसके बाद कर्मियों ने एक दूसरे को मुंह मीठा कराया। साथ ही उपस्थित कर्मियों व स्थानीय लोगों ने एक दूसरे को बधाई देते हुए अनुमंडल के शतत विकास की कामना भी की। मौके पर प्रधान लिपिक नीलकमल सिंह, ध्रुव कुमार, राकेश कुमार, राजकुमार, जितेंद्र कुमार, सुनील कुमार पांडे, दिलीप रजक तथा मुकेश कुमार सिंह आदि मौजूद थे। बताते चलें कि वर्ष 1976 में आज ही के दिन रोसड़ा अनुमंडल की स्थापना हुई थी। 44 वर्ष बीतने के बाद भी आज तक अनुमंडल क्षेत्र का सर्वांगीण विकास नहीं हो सका है। जनप्रतिनिधि और सरकार पर उदासीनता और रोसड़ा की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए अनुमंडलवासी आज भी कोसने से बाज नहीं आ रहे हैं। मौके पर डीएसपी सहरियार अख्तर समेत अन्य मौजूद थे।

इनसेट : एक बार फिर उठी जिला नहीं बनने की टीस

रोसड़ा,संस : युवा से अधेड़ अवस्था की ओर बढ़ रहे 44 वर्षीय इस अनुमंडल को अब तक जिला का दर्जा नहीं मिलने का टीस एक बार फिर लोगों में जाग उठा है। स्थापना दिवस के अवसर पर सजे-धजे अनुमंडल कार्यालय को देख लोगों के अंदर वर्ष 1994 की याद एक बार पुन: ताजा हो गई। जब तत्कालीन सरकार द्वारा रोसड़ा को जिला बनाने की घोषणा के साथ ही उद्घाटन की तिथि भी निर्धारित कर दी गई थी। उक्त तिथि को अपने आप पर इठलाता अनुमंडल और यहां के लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। लेकिन उद्घाटन की सारी तैयारियां ऐसे ही धरी की धरी रह गई। तत्कालीन जनप्रतिनिधि के अथक प्रयास के बावजूद उद्घाटन को नहीं पहुंचे थे मुख्यमंत्री। और उस दिन से आज तक रोसड़ा के लोग अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इस बीच मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के आश्वासन के साथ-साथ सांसद, विधायक द्वारा सदन में भी इस मुद्दे को जोर-शोर से रखा गया। 26 वर्षों के दौरान कई बार इस 1 सूत्री मांग को लेकर अनुमंडल वासियों द्वारा चरणबद्ध आंदोलन भी चलाया गया। लेकिन ना तो आंदोलन का कोई असर दिखा और ना ही माननीयों के घोषणाओं का ही। आज भी यहां के लोग जिला बनने की सारी अहर्ताएं पूर्ण करने का दावा करते हुए अपनी मांग पर मजबूती से अड़े हैं।

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