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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 16, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पानी के लिए निकल रहे पसीने

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Published: Tue, 16 Jun 2015 10:08 PM (IST)

समस्तीपुर। लोगों के पानी के लिए पसीने बह रहे हैं। भीषण गर्मी में अगर पानी की समस्या हो तो कठिनाई का

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समस्तीपुर। लोगों के पानी के लिए पसीने बह रहे हैं। भीषण गर्मी में अगर पानी की समस्या हो तो कठिनाई का अंदाजा सहज हो सकता है। जिले में पेयजल को लेकर हाहाकार मचा है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग इस समस्या के प्रति बेपहवाह है। लोग अपने बूते पानी की जुगत कर रहे है। भूमिगत जल स्तर नीचे सिखक रहे है। ताल -तलैये सूख गए हैं। चापाकल जवाब देने लगे हैं। कई हिस्सों में जलस्तर औसत से 8 से 9 फीट नीचे तक चला गया है। शहर में भी मोटर पंप जवाब देने लगे हैं। समरेसुबल भी वाटर टैंक भरने में ज्यादा समय ले रहा है। ¨सचाई के लिए गाड़े गए बो¨रग पंप भी जवाब देने लगे है। जिले के गंगा के तटवर्ती विद्यापतिनगर, मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर तथा पटोरी प्रखंड के कई हिस्सों में चापाकल के पानी में है आर्सेनिक की खतरनाक मात्रा है। इन क्षेत्रों में चिन्हित वैसे चापाकलों के पानी को वर्जित कर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्र के लोग आर्सेनिकोसिस रोग से पीड़ित हो रहे हैं। कई क्षेत्रों के पानी में आयरन की प्रचुरता के कारण पानी का रंग पीला हो गया है। वहीं नगर परिषद व आसपास शहरी क्षेत्र की आबादी तकरीबन चार लाख हो गई है। इस हिसाब से शहरी क्षेत्र को 5.6 करोड़ लीटर पानी की प्रत्येक दिन जरूरत है।

----------------पीएचईडी की योजनाओं का सच

अगर जिले में कहीं भी आपकों सड़क किनारे तथा सार्वजनिक स्थल पर खराब पड़े व सूखे पड़े चापाकल दिखे तो समझ लीजिए कि यह लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का चापाकल है। कहने को तो विभाग के द्वारा जिले में 27 हजार से अधिक चापाकल गाड़े गए हैं। जो साधारण मरम्मत के अभाव में भी कई चापाकल खराब पड़े हुए हैं। यही हाल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की है। कहीं जलमीनार बेकार पड़ा है, तो कहीं पाइप में गड़बड़ी से पानी नहीं मिल रहा है। पटोरी बाजार के लोग आजतक जलमीनार का इंजतार ही कर रहे हैं। बिजली आने पर सीधे पंप से सप्लाई हुआ नहीं तो लोग निजी चापाकल से काम चलाते हैं।

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बदहाल है ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना

जिले में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना का हाल बेहाल है। करोड़ों खर्च के बाद भी लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है। कहीं पंप खराब है तो कहीं जलमीनार नहीं। रोसड़ा के सोनूपुर में ग्रामीण जलापूर्ति योजना से ग्रामीणों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ। भिरहा का ग्रामीण जलापूर्ति योजना भी ठप है। दल¨सहसराय के शाहपुर पगड़ा ग्रामीण जलापूर्ति से पानी का सप्लाई बंद है। उजियारपुर के सलेमपुर से भी यदाकदा की पानी सप्लाई होती है। सातनपुर में जलमीनार नहीं बना, पानी सप्लाई सीधे होती है। गांवपुर लखुआ का पेयजलापूर्ति योजना खराब पड़ी है। काली स्थान बेदोलिया, मालती में गाड़े चापाकल में अब तक रैंप नहीं बना और राशि उठाव हो गई। ऐसी तकरीबन दर्जन भर योजनाएं हैं। विभूतिपुर में लोग पेयजल पोस्ट से ही काम चला रहे हैं। नरहन बाजार में पाइप लाइन नहीं बिछा। हसनपुर में जलमीनार सफेद हाथी बना है। विद्यापतिनगर के साहिट में जलमीनार जर्जर है। कल्याणपुर एवं जटमलपुर तीरा पेयजल योजना का भी यही हाल है।

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मेगा प्लान का इंतजार

जिले के पटोरी, मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर तथा विद्यापतिनगर क्षेत्र के लोगों को अब तक मेगा वाटर प्लान इंतजार है। योजना खटाई में पड़ी है। विभाग सिर्फ आर्सेनिक मात्रा की जांच एवं चापाकल को लाल से ¨चहित कर अपना काम खत्म कर लिया है। लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। जवाहरलाल अरबन रिन्यूअल मिशन के तहत इसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर 325 करोड़ खर्च कर लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की योजना ठप पड़ी है।

-------------गुणवत्ता की शुरू हुई जांच

पिछले वर्ष गतिरोध के तहत उठाए गए पेयजल की समस्या के बाद इस दिशा में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। हां पानी की गुणवत्ता जांच का काम शुरू हुआ है। विभाग ने तकरीबन 450 चापाकल के पानी का नमूना लेकर उसकी जांच शुरू की है।

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यहां औसत से नीचे जलस्तर

समस्तीपुर प्रखंड, सरायरंजन प्रखंड, ताजपुर प्रखंड, पूसा प्रखंड, मोरवा प्रखंड, खानपुर प्रखंड, वारिसनगर प्रखंड, दल¨सहसराय प्रखंड, विद्यापतिनगर प्रखंड, मोहिउद्दीननर, उजियारपुर प्रखंड तथा विभूतिपुर प्रखंड में भूमिगत जल का लेयर नीचे चला गया है।

यहां ऊपर जलस्तर

जलस्तर कल्याणपुर, पटोरी, मोहनपपुर, ¨सघिया, रोसड़ा, शिवाजीनगर, हसनपुर तथा बिथान प्रखंड में भूमिगत जल का लेयर अभी औसत से ऊपर है।

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क्या है शहर में वाटर सप्लाई की स्थिति

शहरवासियों को लोकस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग से जरूरत का महज 0.16 प्रतिशत पानी ही मिल पा रहा है। पानी सप्लाई तथा जिले में पेयजल की समुचित व्यवस्था प्रति लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पूरी तरह उदासीन है। पीएचईडी के भरोसे लोग प्यासे मर जाएंगे। नगर परिषद क्षेत्र व आसपास के शहरी इलाकों की आबादी तकरीबन चार लाख हो चुकी है। प्रति व्यक्ति औसत 140 लीटर पानी की जरूरत होती है इसके हिसाब से अब यहां 56000000 लीटर पानी की प्रत्येक दिन जरूरत है। इसकी जगह इन दिनों पीएचईडी से मात्र 90000 लीटर पानी मिल रहा है। काशीपुर स्थित पंप से आम आदमी का पानी सप्लाई पूरी तरह बंद है। शहर के अंदर कहीं भी पेयजल पोस्ट नहीं है। पूर्व में बिछाए गए 19.2 किलोमीटर तक ही पाइप लाइन सिमटा है। पूर्व में शहर के विभिन्न जगहों पर बने 42 पेयजल पोस्ट का अब अता-पता नही। जलापूर्ति के लिए काशीपुर व बहादुरपुर में एक-एक लाख गैलन क्षमता के दो वाटर टावर लगाए गए थे। लेकिन अब पानी का सप्लाई पूरी ठप हो चुका है। बहादुरपुर के पुराने पंप से भी आधा काम ही लिया जाता है। किसी तरह इन दोनों जगहों से पूरे दिन में 50 हजार गैलन पानी मिल पाता है। इससे भी पानी मात्र बहादुरपुर के कुछ इलाकों में सुबह व शाम में तकरीबन दो-दो घंटे सप्लाई होती है। इससे लोगों की जरूरत भी पूरी नहीं होत है। शहरी के विभिन्न जगहों पर लगे थ्री इंडिया मार्का चापाकल भी बंद पड़ा हुआ है।

जिले में भूमिगत जल के लेयर की स्थिति

प्रखंड भूमि जलस्तर

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समस्तीपुर - 29.1 फीट

सरायरंजन - 29.5फीट

ताजपुर - 25.9 फीट

पूसा - 26.8 फीट

मोरवा - 28.5 फीट

खानपुर - 23.8 फीट

वारिसनगर- 29 फीट

कल्याणपुर - 22.5 फीट

दल¨सहसराय - 25 फीट

विद्यापतिनगर - 28 फीट

पटोरी - 22.9 फीट

मोहनपुर - 22.8 फीट

मोहिउद्दीननगर- 25.1 फीट

उजियारपुर - 26.10फीट,

¨सघिया- 15.9 फीट

रोसड़ा- 19 फीट

शिवाजीनगर - 19 फीट

हसनपुर - 19 फीट

बिथान - 20.1फीट

विभूतिपुर - 25.9 फीट

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वर्जन

शहर में पेयजल ढांचा दुरूस्त होगा। जवाहरलाल अरबन रिन्यूअल मिशन के तहत इसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर 325 करोड़ खर्च होंगे। बूढ़ी गंडक नदी के पानी को प्यूरीफाइड कर सप्लाई होगी। अगले तीस वर्ष की आबादी को ध्यान में रखकर ढांचा तैयार होगा।

शशिभूषण प्रसाद, कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद।