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2 हजार से बड़े UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? 1000 पर कटेंगे 4 रुपये; भड़के व्यापारी, बोले- फिर कैश की ओर लौटेंगे

Published: Thu, 17 Sep 2026 04:23 PM (IST)

UPI Payment MDR Charge Rule : यूपीआई के जरिए 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट भुगतानों पर 0.4% एमडीआर ...और पढ़ें

UPI Payment MDR Charge Rule : 2 हजार से बड़े UPI पेमेंट पर लग सकता है शुल्क; समझें नया गणित

UPI Payment MDR Charge Rule : 2 हजार से बड़े UPI पेमेंट पर लग सकता है शुल्क; समझें नया गणित

HighLights

  1. 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर 0.4% एमडीआर प्रस्तावित।

  2. सहरसा के व्यापारियों में बढ़ी चिंता, लागत बढ़ने की आशंका।

  3. आम उपभोक्ता और व्यापारी शुल्क को अनुचित बता रहे हैं।

संवाद सूत्र, नवहट्टा (सहरसा)। UPI Payment MDR Charge Rule :  डिजिटल इंडिया के तहत देश में कैशलेस लेनदेन की जीवनरेखा बन चुके यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के जरिए बड़े भुगतानों पर अतिरिक्त शुल्क लगने की संभावनाओं ने बाजार का माहौल गर्मा दिया है। सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड सहित सीमांचल-कोसी के बाजारों में व्यापारी वर्ग और आम उपभोक्ताओं के बीच इसे लेकर असमंजस और चिंता का दौर शुरू हो गया है।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से विचाराधीन बताई जा रही नई शुल्क व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) प्रस्तावित किए जाने की चर्चा है।

  • एनपीसीआई द्वारा 2 हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट (व्यापारी) यूपीआई भुगतानों पर 0.4% एमडीआर शुल्क लगाने की चर्चा

  • 2,000 रुपये तक के सामान्य भुगतानों पर कोई चार्ज नहीं; 75 हजार या उससे अधिक के बड़े लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये की कैपिंग

  • सहरसा के नवहट्टा बाजार में उहापोह: कारोबारियों का कहना है कि 90% लेनदेन यूपीआई पर निर्भर, शुल्क बढ़ा तो बढ़ेगी लागत

  • अक्टूबर से लागू होने की अटकलों के बीच बैंकों का स्पष्टीकरण—सरकार व एनपीसीआई के अंतिम लिखित निर्देश के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति

हालांकि, राहत की बात यह है कि आम उपभोक्ताओं के 2,000 रुपये तक के छोटे यूपीआई भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं रहेगा। वहीं, बड़े भुगतानों के मामले में अधिकतम शुल्क की सीमा 300 रुपये तक सीमित (कैप) रखने का प्रावधान सामने आ रहा है।

समझें शुल्क का गणित- किस भुगतान पर कटेगा कितना पैसा]

यदि 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क का प्रारूप धरातल पर उतरता है, तो सरल शब्दों में हर एक हजार रुपये के व्यावसायिक भुगतान पर चार रुपये का शुल्क तय होगा। इसके स्लैब को इस प्रकार समझा जा सकता है:

  • ₹5,000 के भुगतान पर: ₹20 शुल्क

  • ₹10,000 के भुगतान पर: ₹40 शुल्क

  • ₹25,000 के भुगतान पर: ₹100 शुल्क

  • ₹50,000 के भुगतान पर: ₹200 शुल्क

  • ₹75,000 या उससे अधिक: अधिकतम ₹300 (कैपिंग व्यवस्था)

स्थानीय बैंक अधिकारियों का कहना है कि अभी सरकार अथवा एनपीसीआई की ओर से बैंकों को कोई अंतिम आधिकारिक अधिसूचना प्राप्त नहीं हुई है। लिखित गाइडलाइन जारी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह शुल्क मर्चेंट (दुकानदार) वहन करेंगे अथवा उपभोक्ताओं पर इसका अतिरिक्त भार पड़ेगा। बाजार में यह व्यवस्था आगामी अक्टूबर माह से प्रभावी होने की चर्चा चल रही है।

पहले कैशलेस की आदत डाली, अब चार्ज लगाना अनुचित: जनता की प्रतिक्रिया

यूपीआई पर संभावित शुल्क को लेकर नवहट्टा के प्रबुद्ध नागरिकों, ग्राहकों और खुदरा कारोबारियों ने अपनी गंभीर प्रतिक्रियाएं दर्ज कराई हैं:

  • पुतुल कुमारी (उपभोक्ता): पहले वर्षों तक अभियान चलाकर लोगों को नकदी छोड़कर कैशलेस भुगतान की आदत डाली गई। अब जब देश डिजिटल हो चुका है, तो शुल्क थोपा जा रहा है। बैंक पहले से ही एटीएम और एसएमएस समेत कई मदों में सर्विस चार्ज काट रहे हैं। ऐसे में यूपीआई पर किसी भी रूप में अतिरिक्त भार गलत है, सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

  • एस. एस. हिमांशु (व्यवसायी): इसका सीधा असर बड़े कारोबारियों और थोक व्यापारियों पर पड़ेगा। वर्तमान में हमारा करीब 90 प्रतिशत व्यापार पूरी तरह यूपीआई के जरिए संचालित हो रहा है। प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख रुपये की बिक्री में यदि बड़े भुगतानों पर शुल्क कटना शुरू हुआ तो लागत में भारी इजाफा होगा, जिससे व्यापार की गति धीमी पड़ जाएगी।

  • अभिमन्यु अमर (स्टेशनरी विक्रेता): अब तो स्कूली बच्चे और अभिभावक भी किताब, कॉपी और स्टेशनरी के सामान का भुगतान यूपीआई से ही करते हैं। यदि ग्राहकों पर शुल्क का अप्रत्यक्ष दबाव आया, तो छोटे खुदरा दुकानदारों का रोजाना का हिसाब-किताब भी उलझ जाएगा।

  • उदय शंकर नटवर (स्थानीय नागरिक): डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के बाद अचानक शुल्क का प्रावधान करने से आम लोग फिर से नकदी (कैश) की ओर लौटने को मजबूर हो सकते हैं। इससे डिजिटल पारदर्शिता को झटका लगेगा और बाजार में नकदी संकट के साथ कारोबार व ग्राहक दोनों प्रभावित होंगे।