सहरसा। पूर्व मध्य रेल सहरसा स्थित टीआरडी रेल कर्मचारियों के जान पर संकट बन आया है। इन रेल कर्मचारियों को रात में विद्युत ब्रेकडाउन होने पर स्टेशन जाना जान जोखिम में डालने जैसा है। टीआरडी कर्मचारियों का कहना है कि एक तो रात में ब्रेकडाउन होने पर तुरंत ही स्टेशन पहुंचना जरूरी हो जाता है। लेकिन स्टेशन से तीन चार किमी दूर आवास रहने सेआने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। रात के अंधेरे में तो न रिक्शा मिलता है और न ही कोई दूसरी सवारी और अकेले जाने के दौरान अपराधियों का हर हमेशा डर बना रहता है। कर्मचारियों ने पूर्व मध्य रेल के मंडल रेल प्रबंधक सहित अन्य रेल अधिकारियों को भेजे पत्र में अपनी पीड़ा से अवगत कराते हुए कर्मचारियों ने कहा कि हर जगह टीआरडी कर्मचारियों को रेल परिसर में आवास दिया गया है। सिर्फ सहरसा के कर्मचारियों के साथ ही सौतेलापन व्यवहार किया जा रहा है। स्टेशन परिसर में कार्यालय रहने के कारण हर हमेशा दिन हो या रात कॉल होने पर तुरंत जाना पड़ता है। ऐसे में शहर के विभिन्न हिस्सों में किराए के मकान में रह रहे कर्मचारियों को आने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। टीआरडी कर्मचारी वर्ष 2018 से ही सहरसा में कार्यरत है।

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नहीं मिली अब तक प्रोन्नति

वर्ष 2018 से ही सहरसा में टीआरडी कर्मचारी पदस्थापित है। इन लोगों को अब तक पदोन्नति नहीं मिली है। जबकि अब तक इन्हें पदोन्नति मिल जानी चाहिए थी। जिससे रेल कर्मचारियों को एक तो पद का नुकसान हो रहा है और उपर से पदोन्नति के बाद मिलने वाले आर्थिक लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है। डीआरएम को भेजे गए हस्ताक्षरित पत्र में सुनील कुमार सिंह, राजेश कुमार गुप्ता, सुदर्शन यादव, सुनील राम, रामलखन, विनोद पासवान, सुबोध कुमार मिश्र, सत्यनारायण पासवान, चंदन कुमार, रामचरित्र कुमार, सुमित कुमार सहित अन्य ने शीघ्र ही पदोन्नति दिए जाने की मांग करते हुए आवास निर्माण की भी जरूरत बतायी है।

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