सहरसा [जेएनएन]। जदयू के पूर्व सांसद व लोकतांत्रिक जनता दल के संस्थापक शरद यादव ने ऐलान किया कि वे आगामी लोकसभा चुनाव मधेपुरा से लड़ेंगे। मधेपुरा की जनता को उनके प्रति विश्‍वास है। वे इस विश्‍वास को सदा बनाये रखेंगे।

मंगलवार को स्थानीय परिसदन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने इसकी जानकारी देते हुए केन्द्र व बिहार सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार देश को धर्म के आधार पर बांटना चाहती है। लेकिन उनके मंसूबे कभी पूरे नहीं होंगे। इस सरकार ने जो वादे किए थे वह पूरा नहीं हुआ। नोटबंदी के कारण बैंक ठप हो गया। 10 लाख करोड़ का एनपीए हो गया है। जीएसटी के कारण व्यवसायी परेशान हैं।

उन्‍होंने कहा कि चौकीदार कहने वाले के नाक के नीचे से विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे लोग हजारों करोड़ की राशि गटक गए। किसानों की हालत काफी खराब है। उन्हें फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पाता है। मूंग का समर्थन मूल्य 5575 रूपये प्रति क्विंटल तय है, परंतु किसानों को नहीं मिल रहा है। पशु किसानों के लिए धन थे, परंतु उसके दाम गिर गए हैं। आज स्थिति यह है कि 10 करोड़ लोगों को रोजगार देने की जगह 10 करोड़ युवाओं का रोजगार छीन लिया गया। बिहार में खनन नीति के कारण बालू व गिट्टी के दाम बढ़ गये, कोसी के किसानों का मक्का नहीं बिक रहा है।

बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शराबबंदी कानून से हजारों गरीब, दलित, अतिपिछड़ा, आदिवासी जेल चले गये। जल नल, नली गली योजना सिर्फ कागजों पर सिमटी हुई है। शिक्षा की हालत खराब है। रिजल्ट के कारण विद्यार्थी आत्महत्या कर रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का अधिकार छीन लिया गया है। मनरेगा मजाक बन गया है। अस्पतालों में सीरिंज तक नहीं है। लेकिन सीएम किससे विशेष राज्य का दर्जा मांग रहे हैं जबकि केन्द्र में उनके गठबंधन की सरकार है। वह सिर्फ जनता को धोखा देने के नाम पर निर्गुण भजन गा रहे हैं।

बता दें कि नीतीश कुमार का महागठबंधन छोड़ एनडीए के साथ जाने के फैसले के बाद शरद यादव बागी हो गए थे। जदयू द्वारा काफी चेतावनी के बाद भी उन्‍होंने लालू यादव के साथ मंच साझा किया। इसके बाद जदयू की अपील के बाद उनकी राज्‍यसभा की सदस्‍यता भी खत्‍म कर दी गई। इसके बाद शरद यादव ने खुद की पार्टी बनाई और नाम रखा लोकतांत्रिक जनता दल। वे खुद को आज भी महागठबंधन का हिस्‍सा बताते हैं।

Posted By: Ravi Ranjan

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