समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर 233 करोड़ से लगेगी इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, 'कवच' की राह आसान, ट्रेनों में भी गति
समस्तीपुर मंडल के 21 प्रमुख स्टेशनों पर 233 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे ...और पढ़ें

Samastipur Division Electronic Interlocking: समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर ₹233 करोड़ से लगेगी इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, 'कवच' की राह होगी आसान
HighLights
समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित होगी।
₹233 करोड़ की लागत से सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया जाएगा।
स्वदेशी 'कवच' ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के लिए मार्ग प्रशस्त होगा।
संवाद सूत्र, सहरसा। Samastipur Division Electronic Interlocking:भारतीय रेलवे द्वारा यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और ट्रेनों के परिचालन को हाईटेक बनाने की दिशा में पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल के लिए एक बड़ी सौगात दी गई है। रेलवे बोर्ड ने मंडल के 21 प्रमुख स्टेशनों पर सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे को अत्याधुनिक बनाने के उद्देश्य से कुल 233 करोड़ रुपये की लागत वाली 'इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग' (Electronic Interlocking - EI) प्रणाली को प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस योजना के धरातल पर उतरने से समस्तीपुर मंडल में स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' (Kavach) के कार्यान्वयन की राह पूरी तरह सुगम हो जाएगी।
स्वीकृत परियोजना के तहत चिन्हित 21 स्टेशनों पर दशकों पुरानी पारंपरिक रिले-आधारित 'पैनल इंटरलॉकिंग' व्यवस्था को पूरी तरह हटाकर उसकी जगह माइक्रोप्रोसेसर आधारित आधुनिक कंप्यूटरकृत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की जाएगी। इससे न केवल ट्रेनों के परिचालन की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि क्रॉसिंग और सिग्नल क्लीयरेंस में लगने वाले समय की भी भारी बचत होगी।
पूर्व मध्य रेल (ECR) के समस्तीपुर मंडल अंतर्गत 21 प्रमुख स्टेशनों पर सिग्नलिंग सिस्टम के आधुनिकीकरण को मिली मंजूरी
कुल 233 करोड़ रुपये की लागत से पुरानी पैनल इंटरलॉकिंग की जगह लगाई जाएगी अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग
स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ (Kavach) को लागू करने का मार्ग होगा प्रशस्त; मानवीय भूल की गुंजाइश होगी शून्य
सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, मधुबनी और खगड़िया रूट के कोपरिया, सिमरी बख्तियारपुर, सोनबरसा कचहरी, बैजनाथपुर, बुधमा व मुरलीगंज स्टेशन शामिल
सहरसा व कोसी-सीमांचल के ये स्टेशन शामिल
योजना के तहत समस्तीपुर मंडल के जिन 21 स्टेशनों पर सिग्नलिंग ढांचे का कायाकल्प किया जाएगा, उनमें कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल के कई व्यस्त व महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल हैं:
सहरसा व मधेपुरा क्षेत्र: कोपरिया, सिमरी बख्तियारपुर, सोनबरसा कचहरी, बैजनाथपुर, बुधमा एवं मुरलीगंज।
मधुबनी व मिथिलांचल क्षेत्र: मधुबनी, राजनगर, पंडौल, अंगार घाट, नरहन एवं नया नगर।
खगड़िया व अन्य रूट: बदला घाट, धमारा घाट, रुसेरा घाट, रामगढ़वा, भगवानपुर देसुआ, सलौना, इमली, ओलापुर और डॉ. श्रीकृष्ण सिंह नगर गढ़पुरा।
'कवच' प्रणाली के साथ सीधा तालमेल
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ के सफल संचालन के लिए बुनियादी आधार है। यह प्रणाली स्टेशन यार्ड में पटरियों, प्वाइंट्स और सिग्नलों के बीच डिजिटल और सॉफ़्टवेयर आधारित सुरक्षित तालमेल बनाती है। यदि किसी कारणवश लोको पायलट लाल सिग्नल की अनदेखी करता है या ट्रैक पर एक ही दिशा से दूसरी ट्रेन आ जाती है, तो 'कवच' प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से सिग्नल प्राप्त कर ट्रेन में स्वत: आपातकालीन ब्रेक लगा देगी। इससे रेल हादसों की आशंका शून्य हो जाएगी।
उच्च विश्वसनीयता और आसान मेंटेनेंस
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक अत्याधुनिक कंप्यूटर-आधारित तकनीक है, जो पुरानी मैकेनिकल और रिले आधारित प्रणालियों की तुलना में बेहद उच्च विश्वसनीयता प्रदान करती है। इसमें खराबी (Fault) आने पर सिस्टम द्वारा तुरंत त्वरित डायग्नोस्टिक रिपोर्ट दी जाती है, जिससे तकनीकी कर्मियों के लिए रखरखाव और मरम्मत का काम काफी तेज और आसान हो जाता है।
भारतीय रेलवे द्वारा अपने पूरे नेटवर्क में सिग्नलिंग सिस्टम के नवीनीकरण और रेल संरक्षा को पुख्ता करने के तहत उठाया गया यह कदम कोसी-सीमांचल में रेल परिचालन को सुरक्षित और समयबद्ध बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
