सहरसा। शहर के नया बाजार निवासी स्वर्गीय उमेश जायसवाल का श्राद्ध, संपीडन कार्यक्रम में मृतक भोज का बहिष्कार किया गया। गायत्री शक्तिपीठ के तत्वावधान में सभी कर्मकांड वैदिक धार्मिक रीति -रिवाज के अनुसार किया गया। शोकाकुल स्वजनों ने पूरे नेम निष्ठा से सारा विधान धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार की तथा उन्हें स्मरण किया। मृतक भोज के बहिष्कार किए जाने का स्थानीय लोगों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सामाजिक कुरीतियों का नाश होगा।

सोमवार को गायत्री शक्तिपीठ के आचार्यों ने कहा कि भारतीय संस्कृति यज्ञ आदर्शों की संस्कृति है। समाज में आज जो कुरीतियां अपना दानवी विस्तार करती जा रही है। उनसे छुटकारा पाना सहज नहीं है। इसके लिए सम्मिलित होकर प्रयास करना होगा। विवाह एवं श्राद्ध जैसे यज्ञीय एवं संस्कार अनुष्ठानों में ऐसी कुरीतियां प्रवेश कर गई है। यह संपूर्ण समाज को भीतर -ही- भीतर घुन जैसे खाती चली जा रही है। इसके कारण लोगों की आर्थिक स्थिति में लगातार ह्रास होता जा रहा है। पारिवारिक बोझ उठाए नहीं उठता। बच्चों को सही शिक्षा दीक्षा तथा स्वास्थ्य संवर्धन हेतु धन का अभाव है। मृतक भोज और मूढ़ मान्यताओं के नाम पर अपनी साम‌र्थ्य से अधिक कर्ज लेकर खर्च करवाए जाते हैं। गायत्री शक्तिपीठ के ट्रस्टी डा. अरूण कुमार जायसवाल कहते है कि भारतीय संस्कृति के अनुसार मृत्यु के साथ जीवन समाप्त नहीं होता है, बल्कि एक जन्म पूरा करके अगले जीवन की ओर उन्मुख होता है। जिसके निमित्त श्रद्धापूर्वक अनेक कर्मकांड किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में यज्ञ व संस्कार के अतिरिक्त किसी धन के प्रदर्शन एवं अवांछनीयताओं जैसी कुरीतियों के लिए कोई स्थान नहीं है। आचार्यों ने कहा कि यज्ञीय विधि से श्राद्ध का कर्मकांड संपन्न कराने से वैदिक संस्कार प्रक्रिया द्वारा उत्कृष्ट जीवन जीने तथा सत्कार्य करने की ओर शिक्षा एवं प्रेरणा दी जाती थी। उस पर मध्ययुगीन काल में धूर्त एवं ढोंगी लोगों ने नई श्राद्ध पद्धति लाद दिया। जिसका इस कदर विस्तार हो गया कि बहुत सारी कुरीतियां एवं मूढ़ मान्यताएं समाज पर हावी हो गई। इस वर्तमान प्रथा को त्याग कर वैदिक रीति से श्राद्ध कर्म संपन्न कराने की पूर्वजों की प्रथा को पुनर्जीवित किया जाए जिसमें मृतक भोज की मनाही है। परिजन बिनोद जायसवाल, सुरेश जायसवाल ने इन मूढ़ मान्यताओं के बंधनों को यथाशीघ्र तोड़ने का आह्वान लोगों से किया है।

इस अवसर पर सांसद दिनेश चंद्र यादव, राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू डा. अरुण कुमार सिंह, ललन सिंह, रामचंद्र सिंह, अरुण सिंह, मनु आनन्द, गजेन्द्र सिंह, अर्जुन चौधरी सहित अन्य लोग मौजूद थे। फुलेश्वर सिंह, आरएन त्रिपाठी एवं घर के सदस्यों द्वारा पगड़ी बंधन किया गया।

Edited By: Jagran