सहरसा। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांच वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उग्रतारा स्थान यात्रा के पश्चात शुरू की पर्यटक सुविधा को लेकर शुरू किए गए योजनाओं का लाभ पांच साल गुजर जाने के बाद भी पर्यटकों को नहीं मिल पा रहा है। वहीं दुर्गा पूजा का समय नजदीक आते ही पर्यटकों का ध्यान आकृष्ट करने के उद्देश्य से शुरू किया गया उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव बस नाच-गाने तक सिमटता जा रहा है।

पर्यटकों की सुविधा के लिए बना पर्यटक सुविधा केन्द्र, कैफेटेरिया, धर्मशाला, पुस्तकालय, शौचालय का निर्माण तो पर्यटन विकास निगम द्वारा करवाया तो गया लेकिन पांच वर्ष गुजर जाने के बाद भी इनमें से किसी भवन को पर्यटकों के लिए नहीं खोला जा सका। दुर्भाग्यवश पिछले तीन वर्षो से उग्रतारा महोत्सव से पूर्व जिला समाहारणालय में आयोजित होने वाली ग्रामीणों और अधिकारियों की बैठक में उग्रतारा स्थान परिसर में लगे हाई मास्क ठीक करवाने मांग ग्रामीणों द्वारा उठायी जाती रही है लेकिन वो अब भी खराब पड़ा है। उग्रतारा मंदिर, मंडन मिश्र धाम की ऐतिहासिक महत्ता को समझते हुए बिहार कला संस्कृति विभाग द्वारा इन्हें संरक्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में इन स्थलों के नाम जमीन सहित अन्य विवरणों की मांग जिला प्रशासन से की गई थी लेकिन तीन वर्ष गुजर जाने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा उपरोक्त जानकारी कला संस्कृति विभाग को नहीं भेजी जा सकी। मंडन धाम की घेराबंदी, राजकमल क्रीड़ा मैदान में स्टेडियम निर्माण जैसे अन्य विकास कार्य आज भी अधूरे हैं। ऐसे में महोत्सव के आयोजन से महिषी पहुंचने वाले पर्यटकों को होने वाली असुविधा पर भी विचार करने की ग्रामीण सुमन ठाकुर,मदनमोहन ठाकुर,दिलीप चौधरी, अमित आनन्द, रधुनाथ दास आदि का कहना है कि उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव के सातवें वर्ष के आयोजन में जिला प्रशासन सजग दिख रही है लेकिन महिला पर्यटकों के लिए बने शौचालय तक को नहीं खुलवा सकी प्रशासन। वहीं भवनाथ चौधरी, पवन चौधरी, अरबिन्द चौधरी, अनन्त प्रकाश मिश्र सहित अन्य का कहना है कि महोत्सव के आयोजन से पर्यटकों के आने की संख्या में वृद्धि तो हुई है लेकिन उन्हें सरकार द्वारा खर्च की राशि का लाभ पर्यटकों नहीं मिल पाना दुखद है।

Posted By: Jagran