सहरसा। शहर के प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित कुमार कहते हैं कि कोरोना संक्रमण काल में दो वर्ष से छोटे बच्चों को मास्क नहीं पहनाएं। बच्चों में कोरोना का संक्रमण होने पर सामान्यतया बुखार, सर्दी, पेट खराब और आंखों में जलन की शिकायत होती है। बच्चों में 99 प्रतिशत वायरस माइल्ड ही रहता है। तीन दिनों से ज्यादा बुखार रहने, शरीर में दाने, सुस्तीपन, मुंह एवं आंखों में लालीपन होने पर तुरंत ही किसी चिकित्सक से मिलें और सलाह लेकर दवाई शुरू कराएं। कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क सबों के लिए जरूरी है। लेकिन दो वर्ष से छोटे बच्चे को मास्क नहीं पहनाना है। दो वर्ष से ऊपर के बच्चों को अगर घर से बाहर हो तो उसे मास्क जरूर पहनाएं। बच्चों को उसके दादा, दादी व घर के बुजुर्गाें को इंफेक्शन का डर बना रहता है। इसीलिए अगर बच्चे के माता-पिता कोरोना संक्रमित हैं तो वे अपने बच्चें को साथ नहीं रखें। मां अगर कोरोना पॉजिटिव है तो मास्क पहनकर बच्चे को दूध पिलाएं। स्तनपान नहीं रोकना है। कोरोना संक्रमित बच्चे को दूसरे बच्चे से 14 दिन तक अलग ही रखना है अन्यथा दूसरे बच्चे को भी बीमारी फैला सकते है। ऐसे में घरवालों को काफी एहतियात बरतना जरूरी है। कोरोना संक्रमित होने पर होम आइसोलेशन हो जाना चाहिए। इसके बाद तुरंत ही किसी चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार शुरू कर देना चाहिए। घर से जब भी निकलें तो बगैर मास्क के नहीं निकलें। कोरोना काल में घर पर ही रहें जो ज्यादा सुरक्षित रहेंगे। कोरोना संक्रमित होने पर इसकी चिता नहीं करके बल्कि इसका समुचित इलाज शुरू करना चाहिए। चिकित्सक के सलाह पर ही दवाईयों का सेवन करना चाहिए। शारीरिक दूरी का पालन करें और सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचें और बच्चे को घर में ही रखें।