विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 01, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'पंचतत्व में विलीन होना है सृष्टि का शाश्वत सच '

By Edited By:
Published: Tue, 01 Oct 2013 06:47 PM (IST)Updated: Tue, 01 Oct 2013 06:48 PM (IST)

News Article Hero Image

सहरसा, जागरण प्रतिनिधि : आवागमन सृष्टि का नियम है। जो धरती पर जन्म लिया है, उसे पंचतत्व में विलीन होना है। यह सृष्टि का शाश्वत सत्य है। जन्म से मृत्यु तक के सफर में जिन लोगों ने मर्यादा का पालन करते हुए संसार में अपनी अमिट छाप छोड़ी है, वो मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए हैं।

उक्त बातें स्वामी प्रमोद बाबा ने रामानंद स्वामी के 92वीं जयंती समारोह के अवसर पर संतनगर आश्रम में आयोजित सत्संग को संबोधित करते हुए कही। स्वामी अरविन्द बाबा ने कहा कि सदगुरु के बताये मार्ग पर चलकर और उनके व्यक्तित्व का अनुशरण करने से मनुष्य का कल्याण संभव है। पंच पापों का त्याग कर नित सत्संग एवं ध्यान से मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर सकता है। शंकर बाबा ने कहा कि जब तक 'मैं और मेरा' की भावना का त्याग नहीं करेंगे, आत्मचेतना का प्रादुर्भाव नहीं होगा।

इससे पहले स्तुति-विनती से सत्संग की शुरुआत हुई। प्रवचन के पश्चात आरती एवं भंडारा का आयोजन किया गया। सत्संग में स्वामी गुरुनंदन बाबा, सत्यप्रकाश बाबा, परमानंद बाबा, पंकज बाबा, नन्दकिशोर बाबा ने प्रवचन दिये। कार्यक्रम की सफलता में प्रह्लाद डिडवानियां, कृष्णदेव भगत, ओमप्रकाश सिंह, चितरंजन भगत, लक्ष्मी भगत, अनिल भास्कर, देवन, पारस आदि का सराहनीय योगदान रहा।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर