रोहतास [उपेंद्र मिश्र] । डालमियानगर के मकराइन गांव में चिंता देवी के घर छठ के गीत नहीं गाए जा रहे हैं। वहां चीख-पुकार मची है। जहां खुशियां बरस रही थीं, वहां अब चिता जलाने की तैयारी हो रही है। ट्रेन में चिंता देवी की हत्या की सूचना मिलते ही मातम छा गया है। 

विदित हो कि अमृतसर-टाटानगर एक्सप्रेस में उत्तरप्रदेश के बरेली के पास तीन युवकों ने छठ करने घर बा रहे परिवार को सिर्फ इसलिए पीटना शुरू कर दिया कि उन्होंने सिगरेट पीने से मना किया था। बीमार चल रहीं चिंता देवी की मौत हो गई। घटना में उनकी दो बेटियां भी जख्‍ती हो गईं।

शव के साथ घर पहुंचीं दोनों बेटियां काजल और मनीषा को गांव के लोग संभाल रहे हैं। पिता का साया पांच साल पहले ही उठ चुका है। अब मां भी छोड़कर चली गई। यहां का दृश्य हर किसी की आंखें नम किए हुआ है।

चिंता देवी अपने बेटे राहुल और बहू बबीता के साथ छठ करने जालंधर से अपने गांव डालमियानगर के मकराइन आ रही थीं। घर में छठ की तैयारी चल रही थी। वे शुक्रवार से ही मोबाइल पर एक-एक चीज की जानकारी ले रहीं थीं। बेटियां पूरे उत्साह से पर्व की तैयारी में जुटी थीं कि अचानक विपत्ति का पहाड़ गिर पड़ा।

अमृतसर-टाटानगर एक्सप्रेस में उत्तरप्रदेश के बरेली के पास तीन युवक कोच में सिगरेट पीकर हंगामा कर रहे थे। परिवार ने इससे मना किया। यह युवकों को नागवार गुजरा। उन्‍होंने पूरे परिवार को पीटना शुरू कर दिया। इस कारण बीमार चल रहीं चिंता देवी की मौत हो गई। साथ आ रहीं बेटियां व बेटे-बहू भी जख्‍मी हो गए।

चिंता देवी की बेटी ने बताया कि भइया ने सिगरेट पीने से मना किया तो तीनों लड़के पीटने लगे। बीच-बचाव करने पर मां को पटक कर गर्दन को पैर से दबा दिया।

घटना के कारण पूरे इलाके में छठ का माहौल मातमी हो गया हे। नियति के इस खेल के कारण सूप-दउरा यूं ही पड़े रह गए और चिता की तैयारी शुरू हो गई।

Posted By: Amit Alok