रोहतास। स्थानीय गोपालगंज मोहल्ला स्थित महर्षि सदाफलदेव आश्रम में सदगुरू सदाफलदेव जी महाराज की 131 वीं जयंती समारोह के पावन अवसर पर में भजन-प्रवचन व विश्वशांति वैदिक महायज्ञ का आयोजन किया गया। जयंती समारोह में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से काफी संख्या

में महिला व पुरूष श्रद्धालु शामिल हुए।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए डॉ जयप्रकाश ने कहा कि विहंगम योग से हम संसार के समस्त कर्तव्यों का पालन करते हुए सांसारिक कष्टों से ऊपर उठ जाते हैं। विहंगम योग का मूल महाग्रंथ स्वर्वेद है। इस ग्रन्थ के पठन मात्र से हमारे संस्कार शुद्ध होने लगते हैं। जीवन में स्वास्थ्य सुख और शान्ति की त्रिवेणी को प्राप्त

कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मविद्या के अद्वितीय महाग्रंथ स्वर्वेद के प्रकाश में हमारा भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में अभूतपूर्व विकास होने लगता है। आध्यात्मिक जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है। गुरु के बिना यह ज्ञान नहीं प्राप्त हो सकता। गुरु का अर्थ ही है जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।अन्य वक्ताओं ने भी सदाफलदेव जी महाराज की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विहंगम योग के सिद्धांतों के बारे में बतलाया। वहीं जिला संयोजक सुभाष रंजन ¨सह ने कहा कि सद्गुरुदेव ने स्वयं के अनुभव में प्राप्त दुर्लभ ज्ञान को स्वर्वेद महाग्रंथ में अभिव्यक्त किया है। विहंगम योग कोई नया योग नहीं है। मौके पर सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे।

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