रोहतास। आप हमें अधिक से अधिक राजस्व दें, हम उतनी बेहतर सुविधा मुहैया कराएंगे। इस पर रेलवे ने अब काम करने का मन पूरी तरह बना लिया है। सुविधा के अनुरूप आमदनी नहीं देने वाले स्टेशनों व हॉल्टों के अस्तित्व पर आने वाले दिनों में संकट के बादल छा सकते हैं। रेलवे ने अपने विभागीय अधिकारी को स्टेशनों व हॉल्टों पर ठहरने वाली ट्रेनों से प्राप्त होने वाली आमदनी का आंकलन कर रिपोर्ट मांगा है, ताकि उसके हिसाब से मंत्रालय अगला कदम उठा सके। बहरहाल राजस्व के अनुसार ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किया जाएगा।

लगातार घाटे में चल रही रेलवे को उबारने के उद्देश्य से रेल मंत्रालय ने ऐसा निर्णय लिया है। गया-डीडीयू व आरा-सासाराम रेल खंड पर कई ऐसे स्टेशन व हॉल्ट हैं, जहां से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या नहीं के बराबर होती है। जो सफर करते भी हैं, तो बेटिकट ही। जबकि टिकट बिक्री के लिए स्थायी काउंटर से लेकर ठेकेदार तक की भी नियुक्ति की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो गया-डीडीयू रेलखंड पर चिरैला पौथू के अलावा करवंदिया रेलवे स्टेशन हैं, जहां से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या नहीं के बराबर रहती है। वहीं आरा-सासाराम रेलखंड पर मोकर, अगरेर, बरांव मोड़, चनका रामुपर, सुसाड़ी समेत कई हॉल्ट से भी यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या कम पाई गई है। जबकि सभी पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव इन हॉल्टों पर होता है। इस खंड पर दो जोड़ी डेमू पैसेंजर के अलावा आरा-सासाराम व आरा-डीडीयू पैसेंजर सभी स्टेशन व हॉल्ट पर रूकती हैं। कहते हैं अधिकारी :

विभाग हर साल स्टेशन व हॉल्ट से प्राप्त होने वाले राजस्व का आकलन कराता है, ताकि उसके अनुरूप यात्री सुविधाओं को विकसित किया जा सके। कई ऐसे स्टेशन व हॉल्ट हैं, जहां पर पैसेंजर ट्रेनें तो रूकती है, परंतु उसके अनुरूप आमदनी नहीं होती है। यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या भी काफी कम रहती है। वैसी स्थिति में कम राजस्व वाले स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहरने से विभाग को विशेष फायदा नहीं है।

पंकज सक्सेना, डीआरएम, मुगलसराय रेलमंडल

Posted By: Jagran

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