रोहतास। फर्जी सर्टिफिकेट व गलत तरीके से नियोजित शिक्षकों पर भले ही नियोजन इकाई मेहरबान हो व शिक्षा विभाग के अधिकारी सिर्फ पत्राचार कर अपनी जवाबेदही को इतिश्री कर लेते हों। लेकिन निगरानी ऐसे शिक्षकों के विरूद्ध कार्रवाई करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ने की स्थिति में नहीं दिख रहा है। कार्रवाई के मामले में शिक्षा विभाग व इकाई की उदासीनता को देखते हुए अपने स्तर से भी नकेल कसना शुरू कर दिया है। विजिलेंस ने 2011 की टेट परीक्षा के आधार पर 2012 से 2015 के बीच प्रारंभिक विद्यालयों में नियोजित शिक्षकों के वेतन व उनकी उपस्थिति विवरणी विहित प्रपत्र में तलब किया है। निगरानी एसपी ने डीएम, डीईओ व शिक्षा विभाग के डीपीओ स्थापना को पत्र भेज उक्त विवरणी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है। रिपोर्ट बनाने में जुटे विभागीय अधिकारी :

पत्र के आलोक में विभाग रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है। लेकिन अधिकारी को उक्त दस्तावेज तैयार करने में पसीने भी छूट रहे हैं। इन अधिकारियों को भेजे पत्र में निगरानी के एसपी ने कहा है कि 2012 से जून 2015 तक टेट सर्टिफिकेट पंचायत, प्रखंड व नगर निकाय क्षेत्र के प्रारंभिक (प्राथमिक व मध्य) स्कूलों में नियोजित शिक्षकों के वेतन व उनकी उपस्थिति विवरणी हार्ड व साफ्ट कॉपी प्रपत्र के आलोक में उपलब्ध करावें। साथ ही वैसे शिक्षकों से संबंधित उक्त सूचनाएं उपलब्ध कराई जाए, जिनके विरूद्ध निगरानी ने फर्जी टेट प्रमाण पत्र पर नौकरी करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई है। विजिलेंस के इस पत्र के बाद इस दिशा में विभाग अपनी तैयारी शुरू कर दी है। दर्ज हो सकता है आर्थिक अपराध का मामला :

कोर्ट के आदेश के बावजूद स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं देने वाले जाली सर्टिफिकेट पर कार्यरत शिक्षकों से वेतन वसूली की भी कार्रवाई की जा सकती है। विजिलेंस एसपी के पत्र के बाद ऐसी संभावना जताई जाने लगी है कि वेतन विवरणी के आधार पर फर्जी शिक्षकों पर आर्थिक अपराध से जुड़े मामले में दर्ज किए जा सकते हैं। कारण कि सरकार व निगरानी के सख्त निर्देश के बाद भी नियोजन इकाइयां ऐसे शिक्षकों को सेवा में बनाए रखी हुई है और वे वेतन उठा रहे हैं। कुछ दिन पूर्व नव भारत शिक्षा परिषद जैसे अमान्य शिक्षण संस्थान के सर्टिफिकेट पर बहाल दो दर्जन शिक्षकों का वेतन भुगतान रोक के बावजूद किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। मार्गदर्शन की प्रत्याशा में अटकी सेवामुक्ति की कार्रवाई :

जिले में फर्जी प्रमाण प्रत्र व गलत प्रक्रिया के तहत बहाल शिक्षकों की सेवामुक्ति की कार्रवाई में दिनोंदिन पेंच फंसता ही जा रहा है। छह वर्ष पूर्व राजपुर प्रखंड में नियोजित किए गए ढाई दर्जन से अधिक शिक्षकों को हटाने संबंधी कार्रवाई में नियोजन इकाई ढुलमुल की नीति अपनाई हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इसे संज्ञान में लिए जाने व शिक्षा विभाग के लगातार पत्राचार के बाद भी इकाई इन शिक्षकों को अबतक सेवामुक्त नहीं कर पाई है। इकाई का मानना है कि मामला पुराना व नियमावली में सेवामुक्ति की कार्रवाई का उल्लेख नहीं होने के कारण पेचीदा है, ऐसी स्थिति में बिना मार्गदर्शन प्राप्त किए कार्रवाई संभव नहीं है।

Posted By: Jagran