शिक्षकों की हड़ताल पर पूरी तरह से नकेल कसने का मन सरकार ने बना लिया है। 17 फरवरी से मैट्रिक परीक्षा का बहिष्कार व अनिश्चितकालीन हड़ताल पर नियोजित शिक्षकों के जाने के निर्णय के बाद सरकार ने भी अपना रूख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। शिक्षा विभाग के हड़ताल पर जाने व परीक्षा में बाधक बनने वाले शिक्षकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज व उन्हें सेवामुक्त करने के एलान के बाद अब पंचायती राज विभाग ने भी इसी तरह का फैसला लिया है। इसके तहत संगठन का पदाधिकारी बन स्कूल की बजाए दफ्तरों का चक्कर व नेतागिरी करने वाले शिक्षकों को भी सेवामुक्त किया जाएगा।

विभाग के प्रधान सचिव अमृतलाल मीणा ने डीएम, डीईओ, डीडीसी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, प्रखंड प्रमुख, बीडीओ व मुखिया को पत्र भेज परीक्षा के समय हड़ताल पर जाने व परीक्षा में बाधा पहुंचाने तथा मूल्यांकन कार्य में असहयोग करने वाले नियोजित शिक्षकों की पहचान कर उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए बर्खास्त करने को कहा है। साथ ही यह भी कहा है कि कई ऐसे शिक्षक हैं, जो विभिन्न संगठनों के नेता बन वे स्कूल नहीं जाते हैं तथा शिक्षकों को भड़काने का कार्य कर उनके बीच भय व अराजकता पैदा कर रहे हैं। वैसे शिक्षकों को भी बर्खास्त किया जाए जो अराजक व भय का माहौल पैदा कर शैक्षणिक अराजकता पैदा कर रहे हैं। प्रधान सचिव ने कहा है कि मैट्रिक परीक्षा की घोषणा छह माह पहले की की गई है। जिससे लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा हुआ है। शिक्षकों को हड़ताल पर जाने व परीक्षा का बहिष्कार करने के निर्णय से छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। डीईओ प्रेमचंद्र ने कहा कि पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव के पत्र से संबंधित सभी अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

Posted By: Jagran

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