कतरनी-कनकजीरा को पीछे छोड़ता है शाहाबाद का सोनाचूर? वैज्ञानिक जांच में सुगंध, स्वाद और प्रोटीन में बेहतर
कृषि वैज्ञानिक सोनाचूर धान को जीआई टैग दिलाने का प्रयास कर रहे हैं, जो सुगंध, स्वाद और प्रोटीन में अन्य ...और पढ़ें

शहाबाद का सोनाचूर धान।
ब्रजेश पाठक, जागरण, सासाराम (रोहतास)। सोनाचूर धान को विशिष्ट पहचान दिलाने एवं विश्व पटल पर लाने के लिए कृषि वैज्ञानिक उसके गुणों और स्वाद के साथ सेहत के लिए भी अन्य से बेहतर बता रहे हैं।
इस धान को जीआई टैग (भौगोलिक सूचकांक) दिलाने का प्रयास है। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों ने इसका विधिवत परीक्षण किया है।
इस परीक्षण में राज्य के अन्य धान के सुगंधित प्रभेद एवं देसी किस्म कतरनी, कनकजीरा, बादशाहभोग से सुगंध, स्वाद तथा प्रोटीन इसमें ज्यादा मिला है।
संशोधित दस्तावेज भेजा गया चेन्नई
सोनाचूर को जीआई टैग कराने के लिए पहली बार में 245 पेज व दूसरी बार में संशोधित कर 285 पेज का दस्तावेज भी भौगोलिक सूचकांक संरक्षण एवं ट्रेड मार्क कार्यालय, चेन्नई को भेजा गया है।
कृषि वैाानिक बताते हैं कि अब एक दो माह के अंदर इसे जीआई टैग मिलने की संभावना कृषि वैज्ञानिक जता रहे हैं। इस धान को गुणकारी बनाने में सोन नहरों की विशेष भूमिका बताई गई है।
सोनाचूर धान को जीआई टैग के लिए दस्तावेज तैयार करने वाले वरिष्ठ बीज वैज्ञानिक सह वानस्पतिक अनुसंधान केंद्र, विक्रमगंज के कृषि वैज्ञानिक डाॅॅ. प्रकाश सिंह बताते हैं कि सोनाचूर धान को शाहाबाद की पहचान के रूप में स्थापित करने पर बल दिया गया है।
उनका मानना है कि इस धान को जीआई टैग मिलने के बाद सोन नहरों से पटवन वाले राज्य के सात जिलों (रोहतास, बक्सर, कैमूर, भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद एवं पटना) के विशिष्ट कृषि उत्पादों में सोनाचूर को शामिल कर इसकी खेती को बढ़ावा मिलेगा व किसानों को अच्छी आमदनी होगी।
शाहाबाद का सोनाचूर सबसे बेहतर
डाॅ. प्रकाश सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की मदद से सोनाचूर धान के 44 नमूनों को विभिन्न जिलो के किसानों से इकठ्ठा कर उसके विभिन्न गुणों की जांच की ।
इसके बाद सोनाचूर को प्यूरीफाई किया तथा गुणवत्ता एवं विभिन्न गुणों का परीक्षण किया गया | इसी परीक्षण में शाहाबाद के सोनाचूर को बेहतर माना गया है।
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि सोनाचूर धान को विशिष्ट पहचान दिलाने एवं विश्व पटल पर लाने के लिए सबसे पहले उत्पादक संज्ञ का गठन कराया गया।
सर्वप्रथम संघ का गठन किया गया, जिसका नाम शाहाबाद सोनाचूर धान उत्पादक संघ रखवाया गया। उसके उपरांत, चयनित सोनाचूर प्रभेद की गुणवत्ता एवं विभिन्न गुणों का परिक्षण किया गया।
इसके लिए सोनाचूर उत्पादक संघ के अध्यक्ष व शिवपुर पंचायत के स्यंदन सुमन को अध्यक्ष बनाया गया। अध्यक्ष की मानें तो जीआइ टैग के लिए पहली बार 245 पेज का उसके बाद पुनः उसे संशोधित कर 285 पृष्ठ का दस्तावेज के साथ भौगोलिक सूचकांक संरक्षण एवं ट्रेड मार्क कार्यालय, चेन्नई को भेजा जा चुका है |
जिससे सोनाचुर धान को शाहाबाद की पहचान के रूप में स्थापित हो एवं राज्य के सात जिलों के विशिष्ट कृषि उत्पादों में वैश्विक पहचान स्थापित करने की कृषि विभाग के प्रयास को बल मिले।
बताया कि दस्तावेज भेजने के बाद जीआई निबंधन कार्यालय द्वारा राज्य सरकार से सर्टिफिकेट एवं संघ को सत्यापित करने के लिए पत्र भेजा गया था।
इसपर खेती करने वालों की सूची मांगी गई है। उस सूची को भी डीएम के माध्यम से भेजवाया गया है। जल्द ही इसे जीआई टैग मिलने की संभावना है।
क्या है भौगोलिक सूचकांक
भौगोलिक संकेतक एक ऐसा नाम या चिह्न है जिसका उपयोग उन विशेष उत्पादों पर किया जाता है जो किसी विशिष्ट भौगोलिक स्थान या मूल से संबंधित होते हैं। इसकी मान्यता मिलने पर वैश्विक स्तर पर इसकी पहचान होती है।
