37 साल का इंतजार खत्म! इंद्रपुरी जलाशय का रास्ता साफ, बिहार-झारखंड के 9 जिलों के किसानों को मिलेगा फायदा
बिहार और झारखंड के बीच ढाई दशक पुराना सोन नदी जल बंटवारे का विवाद सुलझ गया है, जिससे 37 साल से लंबित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

सोन जल बंटवारे पर सहमति के बाद अब बनेगा जलाशय। फाइल
HighLights
सोन नदी जल बंटवारा विवाद ढाई दशक बाद सुलझा।
37 साल से लंबित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना को मिली मंजूरी।
बिहार-झारखंड के 9 जिलों की लाखों एकड़ भूमि सिंचित होगी।
संवाद सहयोगी, डेहरी ऑन सोन (रोहतास)। बिहार व झारखंड के बीच ढाई दशक से जारी सोन नदी के जल बंटवारे का विवाद अंततः सुलझ गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच सहमति बन गई।
इस ऐतिहासिक समझौते के साथ ही पिछले 37 वर्षों से लंबित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
लंबे समय से प्रयासरत थे कुशवाहा
राज्यसभा सदस्य व राष्ट्रीय लोक समता मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार की शाम डेहरी में प्रेस वार्ता कर इस समझौते पर खुशी जताई।
उन्होंने इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल व बिहार के मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
कहा कि वे 2014 में काराकाट से सांसद चुने जाने के बाद से ही इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रयासरत थे।
पिछले वर्ष राज्यसभा में यह मुद्दा उठाए जाने के बाद पूर्वी क्षेत्रीय अंतरराज्यीय परिषद की बैठक में समाधान का आश्वासन मिला था, जिस पर हाल ही में रांची में आयोजित बैठक में सहमति की नींव रखी गई।
नौ जिलों की लाखों एकड़ भूमि होगी सिंचित
इंद्रपुरी जलाशय के निर्माण से बिहार और झारखंड दोनों राज्यों को बड़ा फायदा मिलेगा। इस परियोजना से बिहार के सात जिले रोहतास, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल व पटना तथा झारखंड के गढ़वा और पलामू जिलों की लाखों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का पानी उपलब्ध हो सकेगा।
वहीं, स्थानीय विधायक राजीव रंजन उर्फ सोनू सिंह, भाजपा नेता प्रो. बलराम मिश्रा, पूर्व विधायक सत्यनारायण सिंह समेत कई एनडीए नेताओं ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि जलाशय का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा।
