रोहतास। सरकारी विद्यालयों में गुणात्मक शिक्षा को ले सरकार तरह-तरह की योजना व कार्यक्रम चला रही है। लेकिन उसे सफलता हासिल नहीं हो पा रही है। जिले के लगभग दो सौ उच्च विद्यालयों में शुरू स्मार्ट क्लास के संचालन में भी कुछ अड़चन आने से अधिकारी भी परेशान दिखने लगे हैं। क्लास की सतत की जा रही मॉनिटरिग में स्मार्ट कक्षा के संचालन में कोचिग संस्थानों के आड़े आने की बात कही जाने लगी है। कारण कि जिस समय में स्कूल अवधि है, उसी वक्त कोचिग संस्थान का भी संचालन हो रहा है। जबकि स्कूल-कॉलेज अवधि में किसी भी हालत में कोचिग संस्थान संचालित नहीं करने का निर्देश पूर्व में डीएम दे चुके हैं। बावजूद कोचिग के अवधि में कोई बदलाव नहीं आ सका है। आखिर आदेश को कौन पहनाएगा अमलीजामा :

चाहे कोचिग संस्थानों के निबंधन की बात हो या फिर संचालन समय का निर्धारण का। इसे कौन अमलीजामा पहनाएगा, इसे अभी तक न तो जिला प्रशासन ही तय कर सका है न शिक्षा विभाग। शायद यही कारण है कि अब तक जिले में एक भी कोचिग संस्थान अधिनियम के तहत निबंधित नहीं हो सके हैं। जबकि निबंधन को ले विभागीय निदेशक से लेकर डीएम तक ने कई बार फरमान जारी कर चुके हैं। उच्चाधिकारियों का फरमान कागज तक ही सिमट कर रह गया है। एक वर्ष पूर्व भगत सिंह छात्र नौजवान सभा के सदस्यों की मांग पर डीएम पंकज दीक्षित ने डीईओ को पत्र भेज स्कूल-कॉलेज अवधि में कोचिग संचालन पर पूरी तरह लगाम लगाने का निर्देश दिया था। जिसकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से संबंधित प्रखंड के बीईओ को दी गई थी। एक भी निबंधित नहीं है कोचिग संस्थान :

जिले में संचालित होने वाले कोचिग संस्थानों की संख्या हजार को पार कर गया है। लेकिन उसमें से एक भी कोचिग संस्थान अधिनियम के तहत निबंधित नहीं हैं। इसके पीछे प्रशासनिक इच्छा शक्ति का अभाव को मुख्य वजह बताया जा रहा है। इस दिशा में सरकार का आदेश कागज तक ही सिमट कर रह गया है। निबंधन के नाम पर सिर्फ आवेदन जमा होने तक की प्रक्रिया पूरी की गई है। न तो आवेदन के आलोक में संस्थानों की जांच पूरी की जा सकी है न उन्हें निबंधित किया जा सका है। जिसका फायदा संचालक उठाने से पीछे नहीं रहे हैं। यही कारण है कि आज हर रोज नए-नए कोचिग संस्थान खुल रहे हैं, जिनका संचालन मापदंड के अनुसार नहीं किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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