शेरशाह रौजा तालाब का पानी हुआ जहरीला? 8 क्विंटल मछलियां मरीं, सामने आई बड़ी वजह
सासाराम के ऐतिहासिक शेरशाह रौजा तालाब में पानी प्रदूषित होने से लगभग आठ क्विंटल मछलियां मर गईं, जिससे मत्स्य पालक को लाखों का नुकसान हुआ है।

आउटलेट और इनलेट नहर से पानी नहीं आने के कारण तालाब का पानी हो रहा खराब। जागरण
जागरण संवाददाता, सासाराम (रोहतास)। शहर की ऐतिहासिक धरोहर शेरशाह रौजा के तालाब का पानी प्रदूषित होने से मछलियों के मरने का मामला सामने आया है।
तालाब में मत्स्य पालन के लिए डाली गई मछलियों में से करीब आठ क्विंटल मछलियों के मरने का अनुमान है। इससे मत्स्य पालक को लगभग चार से पांच लाख रुपये के नुकसान की आशंका है।
मछलियों के मरने के बाद तालाब से दुर्गंध फैल रही है। इससे रौजा परिसर में आने वाले पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जाता है कि शेरशाह रौजा के तालाब में पिछले एक दशक से अधिक समय से मत्स्य पालन किया जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से इसके लिए ठेका दिया जाता है।

पानी की निकासी और आपूर्ति की व्यवस्था ठप
तालाब में मछली पालन का ठेका लेने वाले संवेदक दीना चौधरी ने बताया कि पहले इनलेट नहर के माध्यम से तालाब में पानी आता था, जबकि आउटलेट नहर से तालाब का पुराना पानी बाहर निकलता था। पिछले कई वर्षों से यह व्यवस्था ठप है।
उन्होंने बताया कि इनलेट नहर का जीर्णोद्धार तो कराया गया है, लेकिन अब तक उसमें पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इससे तालाब में लंबे समय से जमा पानी दूषित होता जा रहा है।
पानी का संशोधन नहीं होने से आई समस्या
एएसआई के सहायक संरक्षक अमृत झा ने बताया कि तालाब के पानी की सफाई नहीं होने के कारण यह समस्या सामने आई है।
तालाब से गंदा पानी निकालने और उसमें साफ पानी लाने के लिए बनाई गई व्यवस्था फिलहाल काम नहीं कर रही है। पानी दूषित होने के कारण मछलियों के मरने के साथ तालाब से दुर्गंध भी फैल रही है।
सिंचाई विभाग की है पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी
तालाब में इनलेट नहर के माध्यम से पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। ऐसे में तालाब में साफ पानी की आपूर्ति और पुराना पानी बाहर निकालने की व्यवस्था बहाल करने के लिए संबंधित विभागों के स्तर पर कार्रवाई की जरूरत है।
ऐतिहासिक शेरशाह रौजा परिसर में तालाब का महत्वपूर्ण स्थान है। लंबे समय से पानी की निकासी और आपूर्ति की व्यवस्था बाधित रहने से न केवल मत्स्य पालन प्रभावित हुआ है, बल्कि तालाब के पर्यावरण और पर्यटक सुविधाओं पर भी इसका असर पड़ रहा है।
