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पिता करते थे मजदूरी, बेटी पहले बनीं दरोगा और फ‍िर BPSC पास कर अधिकारी; रोहतास की सीमा की संघर्षगाथा

Published: Fri, 09 Oct 2026 04:49 PM (GMT+05:30)

रोहतास के नक्सल प्रभावित नौहट्टा क्षेत्र की सीमा कुमारी ने बीपीएससी 70वीं परीक्षा में 1036वीं रैंक हासिल कर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी का पद प्राप्त किया है।

प्रखंड कल्‍याण अधिकारी बनीं सीमा कुमारी। सौ-स्‍वयं

प्रखंड कल्‍याण अधिकारी बनीं सीमा कुमारी। सौ-स्‍वयं

HighLights

  1. सीमा कुमारी ने बीपीएससी 70वीं परीक्षा में 1036वीं रैंक हासिल की।

  2. नक्सल प्रभावित क्षेत्र और गरीबी से निकलकर बनीं प्रखंड कल्याण पदाधिकारी।

  3. उनकी सफलता रोहतास की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।

संवाद सहयोगी, डेहरी ऑन सोन (रोहतास)। कभी नौहट्टा, रोहतास प्रखंड लाल गलियारे के रूप में विख्यात था। वर्ष 2011 तक नक्सली हिंसा और लाल आतंक के साये में यह क्षेत्र कराहता रहा।

जहां कभी बेटियों की पढ़ाई और उनके सपने गांव की दहलीज लांघने से पहले ही दम तोड़ देते थे। खौफ और अशिक्षा के उसी दुर्गम परिवेश से निकलकर रोहतास प्रखंड के रसूलपुर गांव की सीमा कुमारी ने इतिहास रच दिया है।

उन्होंने बीपीएससी 70 वीं परीक्षा में 1036 वीं रैंक हासिल की। इसके बाद प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के पद पर उनकी नियुक्‍त‍ि हुई है। 

मजदूरी कर पिता ने क‍िया लालन-पालन 

निहायत ही गरीब परिवार में 21 जून 1999 को जन्मीं सीमा की यह सफलता केवल एक पद की प्राप्ति नहीं,बल्कि परिस्थितियों के खिलाफ एक महासंग्राम की जीत है।

सीमा के पिता धर्मेंद्र सिंह परिवार का पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में मजदूरी करते थे। बाद में रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) की गंभीर समस्या और ऑपरेशन के कारण वे घर लौटने को मजबूर हो गए। 

उसके बाद से गांव में ही खेती-गृहस्थी में मजदूरी करते हैं। इधर सीमित संसाधनों के बावजूद सीमा की लगन अडिग रही। उन्होंने गांव के ही वित्त रहित सरकारी विद्यालय से 2015 में मैट्रिक पास किया।

इसके बाद 2017 में जवाहर लाल नेहरू कॉलेज (डेहरी) से इंटर की पढ़ाई पूरी की। बीसीईसी परीक्षा उत्तीर्ण कर छपरा स्थित लोक नायक जयप्रकाश नारायण इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से 2021 में ईईई (ट्रिपल ई) से बीटेक किया।

पहले दारोगा में हासिल की सफलता 

वर्ष 2022 से पटना में रहकर सेल्फ स्टडी कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की। उनकी कड़ी तपस्या का ही परिणाम था कि 2024 में बिहार पुलिस में दरोगा के पद पर उनका चयन हुआ। 

इसके बाद शिवहर जिला आवंटित हुआ, लेकिन सीमा की मंजिल और आगे थी। दो माह पूर्व आए बीपीएससी के नतीजों ने उनके सपनों को पंख लगा दिए।

फिलहाल वे बिपार्ड (पटना) में पांच महीने का प्रशिक्षण ले रहीं हैं। सीमा की इस सफलता में उनकी गृहिणी माता, शिक्षिका बहन ममता कुमारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

बगल के गांव बंजारी की सुप्रिया आनंद को बीपीएससी कर अंचलाधिकारी बनते देखकर भी इनका मनोबल बढ़ा। इस तरह सीमा ने भी साबित कर दिया कि हौसले अगर बुलंद हों तो गरीबी का अंधेरा भी राह का रोड़ा नहीं बन सकता।

सीमा आज रोहतास की हर उस बेटी के लिए साक्षात नारी शक्ति का प्रतीक बन चुकी हैं। जो अभावों में भी आसमान छूने का माद्दा रखती हैं।

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