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रोहतास में 13.65 करोड़ के रोपवे निर्माण में बदलाव, IIT की तकनीकी जांच के बाद बदली पिलर बनाने की तकनीक

Published: Wed, 30 Sep 2026 02:13 PM (IST)

कैमूर पहाड़ी पर स्थित रोहतासगढ़ किले के रोपवे का निर्माण अब आईआईटी पटना के तकनीकी सुझावों के आधार पर नई ...और पढ़ें

निर्माणस्‍थल पर अधूरा पड़ा काम। जागरण

निर्माणस्‍थल पर अधूरा पड़ा काम। जागरण

HighLights

  1. आईआईटी पटना के सुझावों पर रोपवे का नया निर्माण।

  2. स्टील एंकर बार और रुखरे सरिये का होगा उपयोग।

  3. पर्यटकों के लिए रोहतासगढ़ किला पहुंचना होगा आसान।

सतीश कुमार, सासाराम (रोहतास)। कैमूर पहाड़ी पर स्थित रोहतास गढ़ किला पर बनाए जा रोपवे को निर्माण के दौरान पिछले वर्ष गिरने के बाद अब उसे नए सिरे से बनाने की तैयारी चल रही है।

आईआईटी पटना के तकनीकी सुझाव के आधार पर अब रोपवे के पिलरों का निर्माण होगा। इसमें नई तकनीक और बदले डिजाइन को शामिल किया गया है।

एक माह पूर्व यहां पहुंची IIT की टीम ने तकनीकी जांच के बाद रोपवे पिलरों के निर्माण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है।

लगाए जाएंगे स्‍टील के एंकर बार 

अब पहले की तरह पिलर के लिए गड्ढा खोदकर सीधे सरिया डालने के बजाए निर्धारित गहराई तक खुदाई के बाद स्टील के एंकर बार लगाए जाएंगे। 

जानकार बताते हैं कि एकंर बार का उपयोग किसी सरंचना या कंक्रीट को उसकी नींव से मजबूती से बांधकर रखने के लिए किया जाता है।

पिलर में अब रुखरा सरिया का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सरिया और कंक्रीट के बीच बेहतर पकड़ बनेगी और पिलर की मजबूती बढ़ेगी।

इसके पहले पिलरों के निर्माण में चिकने सरिया का इस्तेमाल की बात सामने आई थी। निर्माण कार्य की निगरानी अब बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के द्वारा तय की गई कंसल्टेंसी करेगी।

ट्रायल के दौरान दस माह पहले ध्वस्त हुआ था रोपवे

1400 फीट ऊंचाई पर स्थित रोहतासगढ़ किला की दुर्गम चढ़ाई को पर्यटकों के लिए सहज बनाने के उद्देश्य से 1324मीटर रोपवे का निर्माण किया जाना है।

रोहतास गढ़ किला व चौरासन मंदिर तक पर्यटकों की पहुंच सुगम बनाने के लिए यह कवायद की जा रही है। दस माह पहले ट्रायल के दौरान रोपवे का एक हिस्सा ध्वस्त हो गया था। 

उसके बाद 13 करोड़ 65 लाख की लागत से हो रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी प्रकिया और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठे थे, इसके बाद तकनीकी जांच के लिए आईआईटी की टीम को लगाया गया।

रोपवे निर्माण कार्य की योजना को वर्ष 2012 में स्वीकृती मिली थी। एक सप्ताह पूर्व डीएम दीपक कुमार मिश्र ने भी  पूरी टीम के साथ पहुंच वहां की भौगोलिक स्थिति का जायजा ल‍िया था।

डीएम ने बताया कि वह स्थल का निरीक्षण कर वस्तु स्थिति से अवगत होने के लिए वहां गए थे। डीएम के अनुसार अब नई तकनीक और संशोधित डिजाइन के साथ रोपवे का निर्माण कार्य जल्द ही शुरु होगा। रोपवे निर्माण में सुरक्षा मानकों का भी ख्याल रखा जाएगा।