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चार दिन पहले रोजगार की तलाश में पुणे गया युवक की मौत, अब शव घर लाने के लिए गांव में चंदा जुटा रहे ग्रामीण

Published: Sat, 29 Aug 2026 06:36 PM (IST)

रोजगार की तलाश में पुणे गए रोहतास के तिलोखर पंचायत के 25 वर्षीय इंद्रजीत कुमार की चार दिन बाद ही ...और पढ़ें

मुश्किल घड़ी में गांव बना सहारा

मुश्किल घड़ी में गांव बना सहारा

HighLights

  1. पुणे में रोजगार की तलाश में गए रोहतास के युवक की मौत।

  2. गरीब परिवार शव लाने में असमर्थ, ग्रामीणों ने चंदा जुटाया।

  3. प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई गई।

पंचायत सूत्र, तिलोखर (रोहतास)। रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र के पुणे गए तिलोखर पंचायत के एक युवक की अचानक मौत हो गई। महज चार दिन पहले ही घर से काम की उम्मीद लेकर निकले 25 वर्षीय इंद्रजीत कुमार की कमरे में तबीयत बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।

सबसे बड़ी मुश्किल अब बेटे का शव पैतृक गांव लाने की है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार से पहले ही बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

रोजगार मिलने से पहले ही चली गई जान, कंपनी ने भी खड़े किए हाथ

तिलोखर पंचायत के वार्ड नंबर 13 निवासी अवधेश राम के पुत्र इंद्रजीत कुमार काम की तलाश में पुणे-अहमदनगर क्षेत्र गए थे। ग्रामीणों के अनुसार, वह जिस कंपनी में काम करने के लिए गए थे, वहां अभी योगदान भी नहीं किया था।

इसी दौरान किराए के कमरे में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार को सहारा देने वाला कोई संस्थागत माध्यम भी सामने नहीं आया।

55 हजार रुपये का किराया सुनकर परिवार के सामने खड़ा हुआ संकट

ग्रामीणों के अनुसार, इंद्रजीत का परिवार बेहद गरीब है। ऐसे में पुणे से शव गांव तक लाने के लिए 55 हजार रुपये की मांग ने परिवार की परेशानी और बढ़ा दी है।

इतनी बड़ी रकम जुटाना उनके लिए संभव नहीं है। बेटे की मौत के सदमे के बीच परिवार शव के इंतजार में है। स्वजन चाहते हैं कि किसी तरह पार्थिव शरीर गांव पहुंचे, ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

मुश्किल घड़ी में गांव बना सहारा, लोग मिलकर जुटा रहे चंदा

परिवार की हालत देखकर ग्रामीणों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। गांव के लोग आपस में चंदा इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि शव को पुणे से तिलोखर लाया जा सके।

भाजपा मंडल अध्यक्ष गुड्डू सिंह के अनुसार अनूप मेहता, रंजीत कुमार, बुचुन साह, पुजारी मंडल, छोटू कुमार, सोनू साह, सत्यनारायण मेहता और राजू प्रजापति समेत कई ग्रामीण इस प्रयास में जुटे हैं। ग्रामीणों की कोशिश है कि किसी तरह परिवार को इस मुश्किल वक्त में अकेला न छोड़ा जाए।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार

ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से भी मदद की अपील की है। उनका कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और वह शव लाने का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है।

ग्रामीणों ने सरकारी स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी मदद मिलने से परिवार पर आर्थिक बोझ कम होगा और युवक का पार्थिव शरीर सम्मान के साथ गांव लाया जा सकेगा।

जिस बेटे से रोजगार की उम्मीद थी, उसी के शव के लिए जुटा रहे पैसे

इंद्रजीत महज चार दिन पहले रोजगार की तलाश में घर से निकले थे। परिवार को उम्मीद थी कि वह काम करेंगे और घर की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेंगे।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अब जिस बेटे के कमाकर लौटने की उम्मीद थी, उसी का शव घर लाने के लिए ग्रामीणों को चंदा जुटाना पड़ रहा है। घटना ने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव को झकझोर दिया है।