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14 साल बाद फिर गुलजार होगी करवंदिया पहाड़ी; पत्थर खनन से खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते

Published: Fri, 29 May 2026 09:21 AM (GMT+05:30)

रोहतास जिले की करवंदिया पहाड़ी में लगभग 14 साल बाद पत्थर खनन कार्य फिर से शुरू होने जा रहा है। ...और पढ़ें

करवंदिया पहाड़ी पर फिर शुरू होगा खनन। फाइल

करवंदिया पहाड़ी पर फिर शुरू होगा खनन। फाइल

HighLights

  1. 14 साल बाद करवंदिया पहाड़ी पर खनन शुरू होगा।

  2. हजारों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

  3. रोहतास की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति।

जागरण संवाददाता, सासाराम (रोहतास)। रोहतास जिले की पहचान रही करवंदिया पहाड़ी एक बार फिर गुलजार होने की ओर बढ़ रही है।

लगभग दो दशक से बंद पड़े पत्थर खनन कार्य को दोबारा शुरू करने की दिशा में सरकार और विभाग ने पहल तेज कर दी है।

अगर सब कुछ योजना के अनुरूप रहा तो आने वाले दिनों में करवंदिया पहाड़ी पर फिर से मशीनों की आवाज गूंजेगी और हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे।

दरअसल, राज्य सरकार ने अप्रैल माह में रोहतास जिले में पत्थर भूखंडों के बंदोबस्त की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया था।

इसके बाद अब जिला प्रशासन और खनन विभाग ने जमीन स्तर पर तैयारी तेज कर दी है। विभाग द्वारा जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन (डीएसआर) तैयार कर सरकार को भेज दिया गया है।

दो ब्लॉक में शुरू होगा खनन कार्य

खनन विभाग के अनुसार सासाराम प्रखंड के गायघाट और गिजुआही मौजा में लगभग 1300 हेक्टेयर क्षेत्र को खनन के लिए चिन्हित किया गया है।

इन क्षेत्रों में दो अलग-अलग ब्लॉक बनाकर खनन कार्य शुरू करने की योजना है। विभागीय निर्देश मिलते ही बंदोबस्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

खनन कार्य शुरू होने के साथ ही बड़े पैमाने पर क्रशर मशीनों के संचालन की अनुमति भी दी जाएगी। इससे सिर्फ पत्थर उद्योग ही नहीं, बल्कि परिवहन, मशीन संचालन, मजदूरी और कारोबार से जुड़े हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

दूसरे राज्यों तक है करवंदिया पत्थर की पहचान

करवंदिया पहाड़ी का काला पत्थर लंबे समय से अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां की गिट्टी और पत्थर की मांग सिर्फ रोहतास तक सीमित नहीं रही, बल्कि झारखंड, यूपी, बंगाल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों तक रही है।

इसी पत्थर से सिलौटा, जाता और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं तैयार कर बाहर भेजी जाती थीं। खनन बंद होने के बाद यह पूरा उद्योग लगभग ठप पड़ गया था, लेकिन अब इसके फिर से जीवित होने की उम्मीद जगी है।

बाजारों में लौटेगी रौनक

खनन और क्रशर उद्योग के बंद होने से करवंदिया, अमरा तालाब, बांसा और चांदनी चौक जैसे इलाकों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो गई थीं। मजदूरों की आवाजाही रुकने से साप्ताहिक बाजारों की रौनक भी खत्म हो गई थी।

अब खनन कार्य दोबारा शुरू होने की संभावना से स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों में उत्साह है। लोगों को उम्मीद है कि रोजगार बढ़ने से बाजार फिर गुलजार होंगे और इलाके में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

2012 में बंद हुआ था खनन कार्य

जिले में वर्ष 2012 तक करीब 400 क्रशर मशीनें संचालित होती थीं। जिला प्रशासन ने खनन पट्टा के आधार पर इनके संचालन की अनुमति दी थी।

लेकिन जून 2012 में करवंदिया पहाड़ी में खनन कार्य पूरी तरह बंद कर दिए जाने के बाद एक-एक कर सभी क्रशर मशीनों की अनुज्ञप्ति रद कर दी गई थी।

अब लगभग 14 वर्षों बाद सरकार की नई पहल से स्थानीय लोगों को फिर से रोजगार और आर्थिक मजबूती की उम्मीद दिखाई देने लगी है।

क्या बोले अधिकारी

जिला खनन पदाधिकारी रणधीर कुमार ने बताया कि विभागीय निर्देश पर पत्थर खदानों का जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन तैयार कर विभाग को भेज दिया गया है।

सासाराम प्रखंड के गायघाट और गिजुआही मौजा में दो ब्लॉक खनन कार्य के लिए चिन्हित किए गए हैं। विभागीय निर्देश मिलते ही बंदोबस्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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