पंखों से निकलने वाली बेकार हवा अब बनाएगी बिजली, रोहतास के यशवंत के आविष्कार को मिला नेशनल पेटेंट
यशवंत कुमार सिंह और उनकी टीम ने एक विशेष हाइब्रिड वर्टिकल-एक्सिस पवन टरबाइन का आविष्कार किया है। यह प्रणाली कारखानों ...और पढ़ें

यशवंत कुमार सिंह। सौ-स्वजन
उपेन्द्र मिश्र, डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)। शहर के गांधी नगर निवासी और स्वर्गीय आलोक कुमार सिंह के पुत्र यशवंत कुमार सिंह ने विज्ञान और ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
यशवंत कुमार सिंह और उनकी टीम ने एक विशेष संकर ऊर्ध्वाधर-अक्ष पवन टरबाइन ((Hybrid Vertical-Axis Wind Turbine - VAWT)) और वायुगतिकीय निर्देशक फलक प्रणाली का आविष्कार किया है।
यह प्रणाली कारखानों, कोयला और धातु की खदानों, भू-मार्ग (मेट्रो) सुरंगों और बड़े व्यावसायिक भवनों में लगे भारी संवातन (Ventilation) और निकास पंखों से निकलने वाली बेकार हवा को बिजली में बदल देगी।
व्यर्थ जाने वाली हवा का होगा सदुपयोग
अब तक यह हवा बिना किसी उपयोग के व्यर्थ चली जाती थी। यह नई तकनीक व्यर्थ जाने वाली हवा की गति को 'वेंचुरी प्रभाव' से 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा देती है।
इससे टरबाइन तेज गति से घूमती है और स्वच्छ बिजली का उत्पादन होता है। इस खोज के लिए भारत सरकार के बौद्धिक संपदा कार्यालय ने यशवंत और उनकी टीम को आधिकारिक रूप से नेशनल पेटेंट प्रदान किया है।
आविष्कार का नाम संवातन पंखा निकास पर ऊर्जा पुनर्प्राप्ति के लिए निर्देशक फलक के साथ निकास वायु संवर्धित संकर पवन टरबाइन की प्रणाली है।
इसके आविष्कारकों में IIT (भारतीय खनि विद्यापीठ) धनबाद।यशवंत कुमार सिंह, प्रो. सुब्रत कुमार घोष और प्रो. तन्मय मैती। यशवंत इस शोध दल के प्रमुख अन्वेषक हैं।
इस तकनीक की तीन बड़ी खासियत
- ऊर्जा की बचत: इससे बनी बिजली को वापस संवातन प्रणाली में भेजा जा सकता है, जिससे बिजली की खपत में 4 से 6 प्रतिशत तक सीधी बचत होगी।
- पंखे पर कोई अतिरिक्त भार नहीं: यह उपकरण मुख्य निकास पंखे की हवा फेंकने की क्षमता में कोई रुकावट या दबाव नहीं डालता।
- दोहरी कार्यप्रणाली: पंखा बंद रहने पर भी यह प्राकृतिक हवा से लगातार बिजली बना सकता है। इसमें सेवोनियस और डैरियस घूर्णक के संयोजन और समायोज्य निर्देशक फलक लगाए गए हैं, जो कम हवा में भी घूमना शुरू कर देते हैं।
साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान में वैश्विक स्तर का शोध कर एकस्व हासिल करना डेहरी के युवाओं के लिए प्रेरणा है। यशवंत ने अपनी सफलता का श्रेय अपने स्वर्गीय पिता, परिवार और गुरुजनों को दिया है।
