दहेज हत्या का केस, 8 लोग जेल और 12 साल की तबाही… फिर जिंदा मिली वह महिला; जिसे पुलिस ने मृत मान लिया था
रोहतास में 12 साल पहले दहेज हत्या के आरोप में मृत घोषित की गई महिला शकुंतला देवी झारखंड में जिंदा ...और पढ़ें

शकुंतला देवी उर्फ कांति देवी
HighLights
रोहतास में 12 साल बाद दहेज हत्या की मृत महिला जिंदा मिली।
पति समेत आठ ससुराल वालों को झूठे आरोप में जेल हुई थी।
पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल, कार्रवाई की मांग।
जागरण संवाददाता, सासाराम/डेहरी आनसोन। रोहतास से दहेज हत्या के एक ऐसे मामले का खुलासा हुआ है, जिसने पुलिस की जांच व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस महिला की हत्या का आरोप लगाकर उसके ससुराल के आठ लोगों को जेल भेजा गया था, वह करीब 12 साल बाद झारखंड में जिंदा मिली है।
परिवार का आरोप है कि महिला की पहचान और शव का ठोस सत्यापन किए बिना ही उसे मृत मान लिया गया। इस कार्रवाई के बाद पति समेत परिवार के आठ सदस्यों को लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और परिवार को आर्थिक व सामाजिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
2014 में अचानक घर से गायब हुई थी शकुंतला
मामला डेहरी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बालरती बिगहा का बताया जा रहा है। दिलीप महतो के पुत्र अरुण कुमार की शादी वर्ष 2003 में औरंगाबाद के पिरौटा निवासी हजारी वर्मा की पुत्री शकुंतला देवी उर्फ कांति देवी से हुई थी।
वर्ष 2014 में शकुंतला अचानक ससुराल से गायब हो गई। इसके बाद मायके वालों की ओर से 20 अगस्त 2014 को डेहरी नगर थाने में दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया गया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने एक अज्ञात शव के मामले को शकुंतला से जोड़ दिया।
अज्ञात शव को शकुंतला मानने का आरोप, आठ लोगों पर पहुंची कार्रवाई
मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद पति अरुण कुमार, ससुर दिलीप महतो, सास भगवानों देवी समेत परिवार के आठ सदस्यों को जेल जाना पड़ा। इनमें बबीता देवी, देवर भरत महतो, गोतनी सविता देवी, देवर गोबिंद महतो और गोतनी संजू देवी के नाम भी शामिल हैं।
परिवार का कहना है कि मामले की कानूनी लड़ाई में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। यहां तक कि जमीन और गाड़ियां बेचकर कानूनी खर्च पूरा करना पड़ा। बाद में सासाराम कोर्ट से मामला समाप्त हुआ, लेकिन तब तक परिवार को बड़ा आर्थिक और मानसिक नुकसान हो चुका था।
12 साल बाद मिली ऐसी सूचना, जिसे सुनकर परिवार के भी उड़ गए होश
मामले में नया मोड़ तब आया जब ससुर दिलीप महतो को गुप्त सूचना मिली कि उनकी बहू शकुंतला झारखंड के कांडी थाना क्षेत्र के लभारी कला गांव में रह रही है।
परिजनों ने वहां पहुंचकर महिला के बारे में जानकारी जुटाई और उसकी पहचान शकुंतला के रूप में होने की पुष्टि की। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।
झारखंड पहुंची रोहतास पुलिस, महिला को सकुशल किया बरामद
एसपी के निर्देश पर डेहरी मुफस्सिल पुलिस की टीम झारखंड पहुंची। पुलिस ने महिला को वहां से सकुशल बरामद किया।
इसके बाद महिला को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया और उसका धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया गया। बयान दर्ज होने के बाद उसे जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल- 12 साल पहले जिसकी मौत हुई, वह कौन थी?
महिला के जिंदा मिलने के बाद पूरे मामले की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्ष 2014 में जिस शव को शकुंतला का मानकर दहेज हत्या का मामला आगे बढ़ाया गया, उसकी पहचान किस आधार पर की गई थी।
परिवार का आरोप है कि यदि उस समय शव की पहचान और अन्य जरूरी तथ्यों का सही तरीके से सत्यापन किया जाता तो आठ लोगों को इतने लंबे समय तक कानूनी और सामाजिक परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।
परिवार ने की जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग
मामला सामने आने के बाद पीड़ित परिवार ने तत्कालीन जांच और कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि गलत पहचान और जांच में लापरवाही के कारण उन्हें वर्षों तक परेशानी झेलनी पड़ी।
साथ ही परिवार ने झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोपों की भी जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब इस मामले में पुलिस की जांच रिपोर्ट और महिला के न्यायालय में दिए गए बयान पर सबकी नजर है।
