श्मशान में जली पिता की चिता, साथ ही टूटी बेटों के अधिकार वाली परंपरा; रोहतास में बेटी ने दी मुखाग्नि
रोहतास के संझौली में असम राइफल्स के जवान रामप्रकाश राम और उनकी बेटी सोनाली की सड़क हादसे में मौत हो ...और पढ़ें

अंतिम संस्कार का रस्म निभाती शिवानी और सलामी देते पुलिस अधिकारी व जवान। जागरण
HighLights
असम राइफल्स जवान और बेटी की सड़क हादसे में मौत।
छोटी बेटी शिवानी ने पिता को दी मुखाग्नि।
मां की अंतिम इच्छा पूरी कर तोड़ी परंपरा।
प्रमोद टैगोर, संझौली (रोहतास)। श्मशान घाट पर सोमवार की देर शाम पसरा सन्नाटा हर किसी के दिल को चीर रहा था। चारों ओर गमगीन चेहरे, छलकती आंखें और अपनों को खोने का असहनीय दर्द था।
सामने चिता पर लेटे थे असम राइफल्स के जवान रामप्रकाश राम और पास ही उनकी बड़ी बेटी सोनाली का पार्थिव शरीर अंतिम विदाई की प्रतीक्षा कर रहा था। हादसे ने एक ही झटके में परिवार से पिता और बेटी दोनों को छीन लिया था।
जिस पिता ने बेटियों की उंगली थामकर उन्हें चलना सिखाया, उनकी आंखों के आंसू पोंछे और जिंदगी की राह दिखाई, सोमवार को उसी पिता को विदा करने का सबसे कठिन फर्ज बेटी शिवानी के हिस्से आया।
बेटी ने दी मुखाग्नि तो नम हो उठीं आंखें
कांपते हाथों और नम आंखों के साथ जब वह पिता की चिता के सामने पहुंची तो वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो उठा। मुखाग्नि देते समय शिवानी के चेहरे पर पिता को खोने का दर्द साफ झलक रहा था।
लेकिन कदमों में मां की अंतिम इच्छा पूरी करने का संकल्प था। तिलई गांव निवासी रामप्रकाश राम रविवार को अपनी बड़ी बेटी सोनाली के साथ बाइक से गुप्ताधाम जा रहे थे।
गांव से कुछ दूर बक्सर कैनाल के समीप एक स्कॉर्पियो के चकमे से उनकी बाइक अनियंत्रित होकर नहर में जा गिरी। हादसे में पिता-पुत्री गहरे पानी में समा गए।
सोमवार देर शाम दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस मार्मिक दृश्य के बीच थानाध्यक्ष पूनम कुमारी ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
मां की अंतिम इच्छा का किया सम्मान
बिहार पुलिस और असम राइफल्स के जवानों ने अपने साथी जवान को अंतिम सलामी दी। विधायक अरुण कुमार ने भी पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
बताया जाता है कि शिवानी की मां की अंतिम इच्छा थी कि उनके निधन के बाद बेटी ही पिता को मुखाग्नि दे। मां की उस इच्छा को सीने में संजोए शिवानी ने आज उसे पूरा कर दिया।
पिता की चिता की उठती लपटों के बीच बहते आंसू मानो कह रहे थे “पापा... आज आपकी बेटी नहीं, आपका बेटा बनकर आपको अंतिम विदाई दे रही हूं।”
श्मशान में सिर्फ एक पिता की चिता नहीं जली, बल्कि बेटी के सम्मान की नई लौ भी जली। यह क्षेत्र का पहला ऐसा उदाहरण है, जिसने उस परंपरा को बदला, जहां अंतिम संस्कार पर केवल बेटों का अधिकार माना जाता था। यह सुखद संकेत है।
पूनम कुमारी, थानाध्यक्ष, संझौली
