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बिहार में खुद को 'विधायक का दामाद' बताने वाले अधिकारी पर कोर्ट का शिकंजा, जज ने ठोका ₹10000 जुर्माना

Published: Tue, 21 Apr 2026 08:55 PM (GMT+05:30)

जिला व्यवहार न्यायालय ने सरकारी कार्य में लापरवाही और अदालत में अमर्यादित व्यवहार के लिए एक विधि प्रशाखा पदाधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

बिहार में खुद को 'विधायक का दामाद' बताने वाले अधिकारी पर कोर्ट का शिकंजा (AI Generated Image)

बिहार में खुद को 'विधायक का दामाद' बताने वाले अधिकारी पर कोर्ट का शिकंजा (AI Generated Image)

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जागरण संवाददाता, सासाराम (रोहतास)। जिला व्यवहार न्यायालय में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां न्यायालय ने सरकारी कार्य में लापरवाही व अदालत में अमर्यादित व्यवहार के लिए विधि प्रशाखा पदाधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया है।

एडीजे चार अनिल कुमार की अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई, जिसमें अधिकारी द्वारा एक रसूख वाले विधायक का दामाद बताकर धौंस जमाने की कोशिश की गई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पिछली तारीख पर समाहर्ता रोहतास द्वारा स्थगन आदेश पेश न कर पाने के पीछे असली लापरवाही समाहर्ता की नहीं, बल्कि विधि प्रशाखा पदाधिकारी की थी।

इसके बाद कोर्ट ने अपना पिछला आदेश बदलते हुए समाहर्ता पर लगाए गए 10 हजार रुपये के जुर्माने को विलोपित कर दिया और वही जुर्माना सीधे विधि पदाधिकारी पर लगा दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट आदेश दिया कि यह राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से काटकर न्यायालय में जमा कराई जाए।

कोर्ट में दिखाई बाहुबली वाली अकड़:

न्यायालय ने अपने आदेश में विशेष रूप से उल्लेख किया कि सुनवाई के दौरान विधि प्रशाखा पदाधिकारी ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय कोर्ट में बेहद अहंकार दिखाया। उन्होंने खुद को एएक विधायक का दामाद बताया व न्यायिक प्रक्रिया पर धौंस जमाने का प्रयास किया।

इस आदेश के बाद अधिकारी ने हाई कोर्ट में खुद न्यायालय को ही पार्टी बनाकर चुनौती दी है। उन्होंने तर्क दिया है कि जब कोर्ट स्वयं एक पक्ष बन गया है, तो वह इस मामले का ट्रायल नहीं कर सकता।

हाई कोर्ट में अवमानना की चेतावनी:

कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा माना है। अदालत ने कहा कि स्थगन आदेश लाने के लिए पहले ही 60 दिन से अधिक का पर्याप्त समय दिया जा चुका है।

अब समाहर्ता, रोहतास को सात दिनों के भीतर यह जवाब देना होगा कि उन्होंने अभी तक अधिकारी के वेतन से जुर्माने की राशि क्यों नहीं काटी। जवाब संतोषजनक न होने पर न्यायालय ने मामले को पटना हाई कोर्ट में अवमानना की कार्यवाही के लिए भेजने की चेतावनी दी है।

क्या है मामला?

मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने बीमा कंपनी को आदेश दिया था की वह पहले दावाकर्ता को भुगतान करे उसके बाद गाड़ी मालिक से अपने रुपये की वसूली के लिए इजराय वाद दाखिल करे, जिसके पश्चात बीमा कंपनी ने यह मुकदमा गाड़ी मालिक पर कराया था।

इस आदेश की प्रति समाहर्ता रोहतास, विधि प्रशाखा पदाधिकारी व जीपी को भेजने का निर्देश दिया गया है।