रोहतास । भगवान महावीर की जयंती बुधवार को डालमियानगर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाई गई।  जहां जैन धर्मावलंबियों ने श्रद्धा व भक्ति के साथ भगवान महावीर की पूजा अर्चना की। 51 कलश से भगवान का अभिषेक हुआ । शांति धारा का पाठ आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। जयंती समारोह में पुजारी सुरेंद्र जैन ने  कहा कि मानव समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर लाने वाले महापुरुष भगवान महावीर का जन्म ईसा से 599 वर्ष पूर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को बिहार के लक्ष्मीगंज के महाराजा श्री सिद्धार्थ और माता त्रिशला देवी के यहां हुआ था ।जिस कारण इस दिन जैन श्रद्धालु  इस पावन दिवस को महावीर जयंती के रुप में मनाते हैं ।कहा कि बचपन में भगवान महावीर का नाम वर्धमान था। जैन धर्म का मानना है वर्धमान ने  कठोर तप  द्वारा अपनी समस्त इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर विजेता कहलाए । उनका यह कठिन तप  पराक्रम के समान माना गया, जिस कारण उनकों महावीर कहा गया और उनके अनुयायी जैन कहलाए।

कहा कि हमें हिसा किसी भी रुप में नहीं करनी चाहिए । सदा सत्य बोलना चाहिए। निर्बल निरीह और असहाय व्यक्तियों की ही नहीं बल्कि पशुओं को भी नहीं सताना चाहिए ।कहा कि आज के दिन सच्चाई, अहिसा तथा सौहार्द के प्रति सभी को प्रतिबद्ध रहने का दिन है । मौके पर जय प्रकाश जैन ,सुशील जैन, राजेश जैन, सतपाल जैन जयवंत जैन समेत अन्य उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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