तुतला भवानी से धुआं कुंड तक... कैमूर पहाड़ी के 800 फीट तक ऊंचे वॉटरफॉल्स, पर्यटकों का मोह लेते हैं मन
कैमूर पहाड़ी पर स्थित तुतला भवानी से धुआं कुंड तक के मनमोहक झरने पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं।

वाटर फाल। फोटो जागरण
HighLights
कैमूर पहाड़ी पर एक दर्जन से अधिक मनमोहक जलप्रपात हैं।
तुतला भवानी, धुआं कुंड जैसे झरने 800 फीट तक ऊंचे हैं।
इन झरनों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ब्रजेश पाठक, सासाराम (रोहतास)। कैमूर की पहाड़ी बरसात के दिनों में पर्यटकों को अपने मनमोहक झरनों के लिए आकर्षित करती रही हैं। इस पहाड़ी की 90 किलोमीटर की परिधि में एक दर्जन से अधिक जल प्रपात प्रकृति की जीवंतता का अनुभव कराते हैं।
तुतला भवानी जलप्रपात, कशिश जलप्रपात, मांझर कुंड, धुआं कुंड, सीता कुंड, सावन सोख, भूखी खोह, महादेव खोह, वंशी खोह जलप्रपात को देख पर्यटक अपनी सारी थकान मिटा प्रकृति की सौंदर्यता को निहारने लगते हैं।
कैमूर पहाड़ी के जल प्रपातों की विशिष्टता यह है कि कहीं पांच सौ तो कहीं आठ सौ फीट की ऊंचाई से पानी गिरता है। इसमें पानी का रंग श्वेत हिम जैसा तो कहीं धुआं जैसा दिखता है।
इन जल प्रपातों का धार्मिक महत्व भी इनके नाम में समाहित है। इन झरनों का पानी की झर झर ध्वनि शांत वातावरण को सितार के तारों की तरह छेड़ती सुनाई देती है।
शक्तिपीठ के रूप में पूजित मां ताराचंडी के पास मांझर कुंड, सीता कुंड, धुआं कुंड, तुतला भवानी, महादेव खोह के पास का झरना, गीता घाट झरना, कशिश जल प्रपात सबसे अधिक आकर्षित करता है।
सासाराम से पांच किलोमीटर की दूरी पर एनएच 119 के रास्ते ताराचंडी धाम से पहाड़ी सड़क सीता कुंड, मांझर कुंड व धुआं कुंड के लिए जाती है।
यहीं तीनों जलप्रपात हैं। धुआं कुंड में 130 फीट की ऊंचाई से पानी गहरी खाई में गिरता है, जो पत्थरों से टकराकर इतने महीन कणों में बंट धुआं का स्वरूप ले लेता है।
वहीं, मांझर कुंड जल प्रपात से ही काव नदी भी निकलती है। यहां प्रकृति का लयबद्ध संगीत सुनने को मिलता है। यहां का पानी औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है।
इसके चार सौ मीटर पहले सीता कुंड झरना है। मान्यता है कि वनवास के क्रम में मां सीता के चरण यहां पड़े थे। यह झरना भी रोमांच से परिपूर्ण है।
एनएच 119 के किनारे तिलौथू से पांच किलोमीटर दक्षिण रामडीहरा गांव के पास मां तुतला भवानी जलप्रपात व कशिश जल प्रपात भी पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है।
जिले के जल प्रपातों को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहां पहुंचने के लिए बेहतर रास्ते, ठहरने की व्यवस्था के साथ पर्यटकों की सुविधा पर विशेष बल दिया गया है। जिससे पर्यटक परिवार सहित आएं व प्रकृति के बीच समय बिताएं।
दीपक कुमार मिश्र, डीएम, रोहतास।
