रोहतास। स्थानीय स्टेट बैंक मेन ब्रांच के सामने मंगलवार को रेलकर्मी से 25 लाख रुपये लूट रहे अपराधियों में से एक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की गई हत्या मामले में शक की सूई सहयोगियों पर ही भी है। हत्या की परिस्थितियों को ले लोग अलग-अलग कयास लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं के पीछे अपराध को अंजाम देने आए अन्य सहयोगियों की भूमिका भी संदिग्ध रहती है। हत्या व लूटपाट जैसी घटनाओं के दौरान जब उनका एक साथी पकड़ा जाता है, तो बाकी के अपराधियों को अपनी पहचान का भय सताने लगता है। जिससे वे चाहते हैं कि पकड़ा गया अपराधी पुलिस के सामने स्वीकारोक्ति बयान के क्रम में उनका नाम न ले पाए। जिससे वे स्वयं या फिर उनके द्वारा भेजे गए अन्य सहयोगी पकड़े गए अपराधी की हत्या के लिए भीड़ को उकसाते रहते हैं। मंगलवार को यहां पुरानी जीटी रोड पर दिनदहाड़े हुई इस घटना में भीड़ द्वारा पकड़े गए अपराधी की हत्या में भी सहयोगियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। आधे घंटे तक हुई पिटाई:

जानकारी के अनुसार लगभग 12 बजे से शुरू लूटपाट के प्रयास की घटना में भीड़ के हत्थे चढ़े अपराधी की लगभग आधे घंटे तक रुक-रुककर पिटाई होती रही। किसी ने उस पर पत्थर तो किसी ने अंधाधुंध डंडे व बेल्ट बरसाए। पीटने के क्रम में कई बार भीड़ रुकी भी, लेकिन अपराधी को मारने के लिए उसे कुछ लोग दोबारा उकसा रहे थे। हालांकि वे स्वयं सामने नहीं आ रहे थे। इस

दौरान पुलिस कहीं एक्शन मोड में नहीं दिखी। हालांकि घटनास्थल के सौ गज पूरब मुफस्सिल थाना है। वहीं पश्चिम तरफ सौ गज से भी कम दूरी पर पोस्ट ऑफिस चौक के पास भी ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। लेकिन किसी ने कानून हाथ में लेने वाली इस घटना को रोकने के लिए कोई पहल नहीं की। जबतक नगर थाना की पुलिस घटनास्थल पर पहुंचती, तब तक भीड़ का इंसाफ हो चुका था। पंकज बच जाता तो अन्य अपराधी भी पकड़े जाते:

मॉब ¨ल¨चग के दौरान यदि समय से पुलिस पहुंच जाती तो न सिर्फ पंकज की जान बच जाती, बल्कि घटना में शामिल अन्य अपराधियों की पहचान हो जाती। जिनसे कई ऐसे आपराधिक घटनाओं पर से भी पर्दा उठ जाता, जिनमें ये अपराधी शामिल हुए होंगे। हालांकि पुलिस इस घटना में शामिल अन्य अपराधियों की गिरेबान तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी का सहारा लेने की बात कह रही है, लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा।

Posted By: Jagran