इंद्रपुरी बराज का पानी खाली किए बिना सोन नदी की गाद का सर्वे, IIT रोपड़ को मिली जिम्मेदारी
इंद्रपुरी बराज के पास सोन नदी से गाद हटाने की कवायद शुरू हो गई है, जिसके लिए आईआईटी रोपड़ बाथिमेट्रिक ...और पढ़ें

इंद्रपुरी बराज में जमी गाद। जागरण
HighLights
आईआईटी रोपड़ करेगा इंद्रपुरी बराज में सोन नदी का सर्वे।
बाथिमेट्रिक सर्वे से गाद की मात्रा और गहराई का आकलन।
गाद हटने से बढ़ेगी जल भंडारण क्षमता, सिंचाई में सुधार।
उपेंद्र मिश्र, डेहरी ऑन सोन (रोहतास)। इंद्रपुरी बराज के पास सोन नदी में लंबे समय से जमा गाद (शिल्ट) को हटाने की कवायद शुरू हो गई है।
जल संसाधन विभाग ने इसके लिए बाथिमेट्रिक सर्वे कराने का निर्णय लिया है। सर्वे का जिम्मा आईआईटी रोपड़ को सौंपा गया है।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नदी तल में जमा गाद की मात्रा और गहराई का आकलन किया जाएगा। इसके बाद गाद की नीलामी कर उसे हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
बराज का पानी खाली किए बिना होगा सर्वे
जल संसाधन विभाग के अनुसार आईआईटी रोपड़ को बाथिमेट्रिक सर्वे के लिए आदेशित किया गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सर्वे के लिए इंद्रपुरी बराज में भंडारित पानी को खाली करने की आवश्यकता नहीं होगी।
बाथिमेट्रिक सर्वे (Bathymetric Survey) तल की गहराई और उसकी बनावट का पता लगाने तथा उसका मानचित्र तैयार करने की एक वैज्ञानिक तकनीक है।
इसे नदी या झील के अंदर टोपोग्राफिक (स्थलाकृतिक) सर्वे भी कहा जाता है। यह तल का 2D या 3D मॉडल बनाने में मदद करता है
इसके माध्यम से भिन्न स्थानों पर जमा गाद की मोटाई, गहराई और कुल मात्रा का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
मुख्य अभियंता अजय कुमार सिंह ने बताया कि इंद्रपुरी बराज के पास सोन नदी से गाद हटाने की दिशा में बाथिमेट्रिक सर्वे महत्वपूर्ण कदम है। सर्वे पूरा होने के बाद निकाली जाने वाली गाद की नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
गाद हटने से बढ़ेगी जल भंडारण क्षमता
अधिकारियों के अनुसार सोन नदी में जमा शिल्ट हटने से इंद्रपुरी बराज की जल भंडारण क्षमता में वृद्धि होगी। इससे नदी में पानी का प्रवाह भी अधिक सुगम हो सकेगा।
खासकर मानसून और बाढ़ के दौरान पानी के निकास में आ रही परेशानियों को कम करने में मदद मिलेगी। गाद की सफाई से सिंचाई व्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय किसानों और आम लोगों ने विभाग की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि नदी में जमा गाद हटने से जलप्रवाह बेहतर होगा और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है।
डेढ़ दशक से जमा हो रही शिल्ट
इंद्रपुरी बराज के निर्माण का इतिहास भी सोन नदी में गाद की समस्या से जुड़ा रहा है। डेहरी के एनिकट बराज में शिल्ट जमा होने के कारण उसके विफल होने के बाद वर्ष 1965 में एनिकट से करीब आठ किलोमीटर ऊपर इंद्रपुरी में सोन बराज का निर्माण कराया गया था।
इंद्रपुरी बराज की लंबाई 4616 फीट है, जबकि इस स्थान पर सोन नदी की चौड़ाई करीब 14 हजार फीट है। बराज की लंबाई अपेक्षाकृत कम रखने के पीछे उद्देश्य यह था कि सोन नदी में आने वाला बालू बराज की संरचना को प्रभावित न करे।
नदी के शेष हिस्से को दोनों ओर पत्थर और मिट्टी से बने बांधों के माध्यम से नियंत्रित किया गया है। हालांकि, पिछले करीब डेढ़ दशक से बराज के समीप सोन नदी में लगातार शिल्ट जमा होने के कारण इसकी जल संचय क्षमता प्रभावित हुई है।
गाद की सफाई की मांग लंबे समय से उठती रही है। अब बाथिमेट्रिक सर्वे के जरिए इसके वैज्ञानिक आकलन और उसके बाद नीलामी की प्रक्रिया शुरू होने से लोगों को इस समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।
