शिक्षा विभाग ने जिले में संचालित निजी विद्यालयों से पिछले दो वर्षों का शुल्क ब्योरा को तलब किया है। संचालकों को सात दिन के अंदर वर्तमान व बीते वर्ष में की गई शुल्क वृद्धि व वसूली गई फीस का ब्योरा जमा करने का फरमान किया है। ब्योरा उपलब्ध नहीं कराने वाले विद्यालयों व उसके संचालकों पर बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

डीईओ प्रेमचंद्र ने बताया कि निजी विद्यालयों द्वारा प्रत्येक वर्ष मनमाने तरीके से की जा रही शुल्क वृद्धि को गंभीरता से लिया गया है। जिससे छात्रों व उनके अभिभावकों को आर्थिक शोषण से बचाया जा सके। विभाग ने सलाना सात फीसद अधिक शुल्क वृद्धि नहीं करने का निर्देश निजी विद्यालयों के संचालकों को दिया है। इसके लिए प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई गई है, जो शुल्क निर्धारण की मॉनिटरिग करेगी। पिछले सितंबर में हुई बैठक में इस तरह के मामले में बड़े पैमाने पर आए हैं कि कई संचालक सात फीसद से अधिक शुल्क की वृद्धि कर फीस की वसूली कर रहे हैं, जो अधिनियम का खुलंखुला उलंघन है। इसलिए संचालक सात फीसद की अनुपात में वसूले गए शुल्क की गणना कर अधिक ली गई राशि को शेष शुल्क में सामंजन करेंगे। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो उनके विरूद्ध अधिनियम के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran

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